देसंविवि एवं एम्स ऋषिकेश के बीच हुआ एमओयू

Published on 2017-11-22

शैक्षणिक गतिविधियों, शोध एवं ग्रामीण विकास कार्यक्रम का होगा आदान-प्रदान

हरिद्वार, २२  नवम्बर।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज व अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के बीच एमओयू हुआ। एम्स के निदेशक एवं सीईओ प्रो.रविकान्त एवं देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने इस एमओयू पर संयुक्त हस्ताक्षर किये। इस समझौते से देसंविवि के शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया।  इससे देसंविवि एवं एम्स के मध्य शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा, तो वहीं शोध, ग्रामीण चिकित्सा विकास एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं चिकित्सों का विभिन्न स्तर पर परस्पर आदान-प्रदान सम्भव होगा।

एम्स के निदेशक पद्मश्री प्रो. रविकान्त ने बताया कि एलोपैथ चिकित्सा पूर्णतः विज्ञान सम्मत होते हुए भी अपने प्रभाव में सीमित है। इसमें रोग का उपचार लगभग २३ प्रतिशत ही हो पाता है, शेष ७७ प्रतिशत रोग का उपचार वैकल्पिक चिकित्सा से ही संभव है। एम्स की एलोपैथ चिकित्सा एवं देसंविवि की योग, आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा में विशेषज्ञता है। दोनों संस्थान मिलकर रोग निदान में एक प्रभावी भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। एम्स के चिकित्सक विभिन्न रोगों के उपचार का प्रशिक्षण तो प्राप्त करते ही हैं, साथ ही देसंविवि से स्वस्थ एवं निरोगी जीवन का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी उपयोगिता और अधिक बढ़ा पायेंगे।

देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने कहा कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ना हमारे संस्थान के लिए गौरव की बात है। देसंविवि में चल रहे वैकल्पिक चिकित्सा के प्रयोगों का एम्स के साथ जुड़कर और अधिक वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण संभव हो पायेगा, जिसकी आज रोग पीड़ित समाज को अत्यन्त आवश्यकता है। वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण से चिकित्सा का लाभ और व्यापक होगा।

देसंविवि में संयुक्त अनुबंध कार्यक्रम के पश्चात पद्मश्री प्रो. रविकांत ने शांतिकुंज में देसंविवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी से भेंट कर किया। इस दौरान उन्होंने अनुबंध संबंधी चर्चा कर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर श्रद्धेय कुलाधिपति जी ने दोनों संस्थानों को चिकित्सा एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अपने करीब चार दशक के चिकित्सकीय अनुभव को साझा करते हुए जरूरतमंदों की निःस्वार्थ भाव से सेवा करने की बात कही। इस अवसर पर देसंविवि के कुलसचिव संदीप कुमार, संकायाध्यक्ष एवं कई विभागाध्यक्ष भी उपस्थित रहे।

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