Published on 2017-11-30
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हरिद्वार, ३० नवम्बर।

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की अधिष्ठात्री शैल दीदीजी का ६४ वाँ जन्म दिन गुरुवार को सादगी से मनाया गया। दीपयज्ञ के साथ जन्मदिवसोत्सव का वैदिक कर्मकाण्ड पूरा किया गया। तत्पश्चात वे १९२६ से सतत प्रज्वलित अखण्ड दीपक का दर्शन कर पावन गुरसत्ता के चरण पादुकाओं से आशीष लिया। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी सहित शांतिकुंज के कार्यकर्ता भाई- बहिनों एवं गायत्री विद्यापीठ के बच्चों ने गुलदस्ता भेंटकर स्वस्थ जीवन की मंगलकामना की।

गीता जयंती, सन् १९५३ को जन्मे शैल दीदीजी का प्रारंभिक जीवन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में बीता। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर से साइकोलॉजी में पीजी एवं शोध करने के बाद अपना जीवन समाजोत्थान हेतु समर्पित कर दिया। उन्होंने परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं परम वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के चरण चिन्हों पर चलकर उनके द्वारा चलाये गए विभिन्न अभियान, नारी जागरण, बाल संस्कार, युवाओं को दिशा देने व पीड़ित मानवता की सेवा करने जैसे सेवापरक कार्यों में अपने आपको पूर्णतः समर्पित कर दिया। साथ ही पतितों के उद्धार के साथ भारतीय संस्कृति के प्रचार- प्रसार में भी पूर्ण रूप से संलग्न रहीं। जिस तरह गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी स्नेह, करुणा, उदारता, समाता और ममता की प्रतिमूर्ति थीं, उसी तरह शैल दीदीजी अपने आपको उदार हृदय रख हमेशा समाज सेवा में तत्पर रहती हैं। उन्हीं की ही प्रेरणा तथा गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के मार्गदर्शन से शांतिकुंज में आपदा प्रबन्धन दल की टीम सदैव तैयार रहती है ताकि कहीं आपदा आए तो यथाशीघ्र पहुँचकर पीड़ित मानवता की सहायता की जा सके। निश्चय ही नारी जाति के लिए शैल दीदीजी आदर्श की मूर्ति स्वरूप हैं।


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