Published on 2017-12-07
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सृजनशील युवाओं को राष्ट्र निर्माण के नैतिक दायित्वों का बोध कराया

जिस पुण्यभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने युवाओं के आदर्श अर्जुन को 'गीता- संदेश' दिया था, अधर्म, अनीति के प्रतिकार और युगधर्म के निर्वाह की प्रेरणा दी थी, उस क्षेत्र के युवाओं को वर्तमान युगधर्म का बोध कराने के लिए शांतिकुंज द्वारा १७, १८ तथा १९ नवम्बर की तिथियों में युवा क्रांति सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन सोनीपत में दीनबंधु छोटूराम विश्वविद्यालय मुरथल के आॅडिटोरियम में आयोजित हुआ। हिमाचल प्रदेश, जम्मू- कश्मीर, चंडीगढ़, उत्तराखण्ड तथा हरियाणा के परिजनों ने इसमें भाग लिया। सर्वाधिक संख्या हरियाणा के प्रतिभागियों की थी।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर अपने अन्य केबिनेट मंत्री श्रीमती कविता जैन के साथ सम्मिलित हुए। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में देश और समाज में गायत्री परिवार के अवदानों का कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया। माननीय सुब्रह्मण्यम भट्ट, संयोजक कुटुम्ब प्रबोधन ने भी युवाशक्ति का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर श्री रमेश कौशिक, सांसद एवं डॉ. राजेन्द्र अनायाध, कुलपति छोटूराम विश्वविद्यालय भी उपस्थित थे।

शांतिकुंज टोली का नेतृत्व आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी कर रहे थे। उनकी टोली में श्री कालीचरण शर्मा, प्रो. प्रमोद भटनागर, श्री के.पी. दुबे, श्री सुखदेव शर्मा, श्री बालरूप शर्मा, श्री सुखदेव शास्त्री आदि रहे। प्रेरणादायी विषयों पर व्याख्यान, भावभरे प्रज्ञागीत, समूह चर्चा तथा युवा क्रांति दीपयज्ञ जैसे कार्यक्रम बड़ी सहजता से सम्पन्न हुए।

-: उल्लेखनीय बातें :-
• समापन सत्र में श्री सुधीर जी, संगठन मंत्री सेवा भारती की मंच पर उपस्थिति उत्साहवर्धक थी।
• विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आॅडिटोरियम को नि:शुल्क उपलब्ध कराया और छात्रों ने पंजीयन, आवास तथा भोजन परोसने का कार्य भावनापूर्वक किया।
• कुछ सत्रों में विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी सम्मिलित हुए।
• विभिन्न प्रान्तों से आये हुए परिजनों ने समूह चर्चा में अपने- अपने क्षेत्रों में नये मंडलों के गठन, 'अखण्ड ज्योति' विस्तार, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, व्यक्तित्व परिष्कार सत्र आयोजन, समयदान जैसे व्यक्तिगत एवं सामूहिक संकल्प लिये।
• नागपुर के राष्ट्रीय शिविर में भागीदारी के संकल्प लिये गये।

हमें अपने समाज को उत्कृष्टता की ओर मोड़ने वाला वह प्रचंड प्रवाह उत्पन्न करना होगा कि कुरुक्षेत्र की भूमि से फिर एक बार सारी दुनिया में क्रांति का संदेश जाये।-प्रो. प्रमोद भटनागर जी

युवा जागृति ही प्रकारान्तर से राष्ट्र जागृति है। देश की स्वतंत्रता के लिए जो उमंग तत्कालीन युवाओं में थी, वही उत्साह अपनी संस्कृति और राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए जागाया जाना है। नागपुर में होने जा रहा राष्ट्रीय युवा क्रांति सम्मेलन इसके लिए आपका आह्वान करता है। -श्री के.पी. दुबे जी

धारा के प्रवाह को चीरने वाले युवाओं की आवश्यकता है- आद. श्री उपाध्याय जी
इस देश को धारा में बहने वाले नहीं, धारा बदलने वाले युवाओं की आवश्यकता है। हमारी संस्कृति का सूत्र है 'उत्तम खेती, मध्यम व्यवसाय, अधम चाकरी'। लेकिन अंग्रेजों ने हमारी मानसिकता बदल दी, हमें गुलामी सिखाई। अब इस मानसिकता को बदलने के लिए महर्षि अरविंद, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी युवाओं की आवश्यकता है।
मनुष्य को सबसे पहले मनुष्यता सीखनी चाहिए। यह आध्यात्मिक विचारधारा से ही संभव है। अध्यात्म से ही त्याग, परोपकार की वृत्ति विकसित होती है। आज अन्नदाता फटेहाल है और बिचौलिये मालामाल हैं। इन परिस्थियों को बदलने वाले क्रांतिकारी युवाओं की आवश्यकता है। शोषण करने वालों के लिए नहीं, हमें देश के उत्थान के प्रबंधन की कला सीखनी होगी।

युवाओं को अपनी सनातन संस्कृति के अनुरूप ढालने का प्रशंसनीय कार्य कर रहा है गायत्री परिवार
श्री मनोहरलाल खट्टर,
माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा

हमारा देश युवा है। युवा ही देश की वास्तविक सामर्थ्य है। युवा भटक जाये तो देश विनाश की ओर जाता है और सँभल जाये तो सुखी- सम्पन्न हो जाता है।

अन्य देशों में उनके नागरिकों का निर्माण उनकी मूल प्रकृति के अनुरूप ही किया जाता है। लेकिन हमारे देश में आज़ादी के ७० वर्षों बाद भी शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। हम गायत्री परिवार के आभारी हैं, जो अपने युवा क्रांति अभियान के अंतर्गत युवाओं को संस्कारवान एवं सृजनशील बनाने का बहुत बड़ा कार्य कर रहा है।


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