Published on 2017-12-07

हिमाचल प्रदेश की बहिनों ने सीखे प्रतिभा परिष्कार के गुर

हरिद्वार, ७ दिसम्बर।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चल रहे पांच दिवसीय नारी जागरण शिविर का आज समापन हो गया। इस शिविर में हिमाचल प्रदेश के छः जिलों की चयनित बहिनें शामिल रहीं। शिविर में बहिनों ने आत्मपरिष्कार एवं रचनात्मक गतिविधियों के संचालन के विभिन्न गुर सीखे, तो वहीं कुरीति उन्मूलन एवं बलिप्रथा को रोकने की दिशा में काम करने हेतु संकल्पित हुईं।
 
अपने संदेश में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि नारियों के जागरण से ही दुनिया का विकास संभव है। नारियों की प्रतिभा व उत्थान के लिए गायत्री परिवार विविध प्रशिक्षण सत्र चला रहा है। प्रतिभाशाली बहिनें अगले दिनों समाज का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने कहा कि अगला समय नारियों का है, इसलिए इन दिनों बहिनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गायत्री परिवार विशेष अभियान व प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से तैयार करने में जुटा है। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदीजी ने कहा कि अपने लिए कठोरता व दूसरों के प्रति उदारता नारी का स्वाभाविक गुण है। नारी ही परिवार के अन्य सदस्यों को भावनात्मक पोषण देती है। शैलदीदीजी ने घर-परिवार से लेकर समाज के विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया।

शिविर के समापन सत्र में श्रीमती मणि दास ने कहा कि नारी अबला नहीं हैं, वह तो पोषण करने वाली सबला है। नारी संवेदना की प्रतिमूर्ति है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ही सबसे बड़ा समय है। भूत को सुधार नहीं सकते और भविष्य को जी नहीं सकते। जो कुछ करना है, वह वर्तमान में ही करें। रचनात्मक कार्यक्रमों में दूसरी बहिनों को भी जोड़ें। श्रीमती दास ने महापुरुषों के जीवन से सीख लेने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर प्रतिभागी बहिनों को युगऋषि के साहित्य एवं प्रमाण पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

पाँच दिन तक चले इस प्रशिक्षण शिविर को श्रीमती अपर्णा पॅवार, डॉ. गायत्री शर्मा, सुशीला अनघोरे, सुश्री दीनाबेन, प्रेरणा वाजपेयी, नीलम मोटलानी, ज्योत्सना मोदी, आरती कांवडे, शशि साहू, स्वाती सोनी आदि बहिनों ने नारी जागरण के विविध पहलुओं पर पॉवर पाइंट प्रेजेण्टेशन के माध्यम से व्यावहारिक व सैद्धांतिक जानकारी दी। शांतिकुंज पूर्वोत्तर जोन की बहिनों ने शिविर के संचालन में विशेष योगदान दिया।


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