Published on 2017-12-07

१०० से अधिक गाँवों में मृतक  भोज पर प्रतिबंध

डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा को भी अनुभव होने लगा है कि विभूतिवान परम पूज्य गुरुदेव के आह्वान पर अपने समय और प्रतिभा का थोड़ा-सा अंश भी समाज के लिए समर्पित करें तो वे कितना बड़ा सामाजिक परिवर्तन कर सकते हैं!
• डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा मृतकभोज बंद कराने के साथ अब लोगों की शराब, विवाहों में अश्लील गाने, दहेज, दिखावा, फैशन, मोबाइल का दुरुपयोग जैसी कुरीतियों को बंद कराने के लिए भी प्रभावशाली प्रयास कर रहे हैं।

नदबई, भरतपुर। राजस्थान
डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा तहसील मुख्यालय नदबई से १५ कि.मी. दूर ग्राम मई जहाँगीरपुर में अपना दवाखाना चलाते हैं। वे कई वर्षों से अखण्ड ज्योति, प्रज्ञा अभियान एवं युग साहित्य का नियमित स्वाध्याय करते हैं। परम पूज्य गुरुदेव के विचारों के प्रखर समर्थक और गायत्री परिवार के नैष्ठिक कार्यकर्त्ता हैं।

दो वर्ष पूर्व डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा के मन में समाज को मृतक भोज की कुप्रथा से मुक्त कराने का संकल्प जागा। इस कार्य के लिए उन्होंने २ घंटे प्रतिदिन समयदान देना आरंभ किया। इस संकल्पित सक्रियता के आधार पर उन्होंने अब तक बयाना, नदबई, बैर, रूपवास, भरतपुर एवं अलवर जिले की कठूमर तहसीलों के १०० से अधिक गाँवों में मृतकभोज की कुप्रवृत्ति को पूरी तरह से बंद कराने में सफलता प्राप्त कर ली है।

डॉ. शर्मा एक प्रभावशाली वक्ता हैं। वे गाँव के विभिन्न समाजों के प्रभावशाली लोगों की सभा बुलाते हैं और मृतक भोज से होने वाले नुकसान इतनी कुशलता से प्रस्तुत करते हैं कि सभी अपने गाँव को इस कुप्रथा से मुक्ति दिलाने के लिए सहज सहमत हो जाते हैं। यहाँ तक कि इन सभाओं में मृतक भोज करने या मृतकभोज में शामिल होने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार और दण्ड के प्रावधान के निर्णय भी लिये जाते हैं।
 
यह प्रयोग बहुत प्रभावी सिद्ध हो रहा है। आरंभ में तो लोगों को अपनी बात समझाने के विशेष प्रयास करने पड़े, लेकिन जब उसके सत्परिणाम दिखाई देने लगे तो अब तो गाँव के लोग स्वयं बुलाकर अपने गाँव से इस कुप्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने में सहयोग करने का आग्रह करने लगे हैं।


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