Published on 2017-12-13
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१० वर्ष के श्रम से अकेले ही बरसाती नाले पर बनाये दो बाँध

जो लोग पहले मजाक उड़ाते थे, वे अब सराहते नहीं थकते
१०० घरों को पानी की समस्या से छुटकारा मिला

मनेन्द्रगढ़, बिलासपुर। छत्तीसगढ़

सफलताएँ सुविधा- साधनों से नहीं मिला करतीं। बुलंद हौसले, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प हो तो सफलता की ऊँची- ऊँची उड़ान भरी जा सकती है। एक अत्यंत गरीब वनवासी गनपत सिंह गोंड़ की कहानी इसी तथ्य को सत्यापित करती है। ६० वर्षीय गनपत सिंह गोंड़ ने अपनी १० वर्षों की अथक मेहनत से अकेले ही पहाड़ी नाले पर १२- १२ फीट के दो अस्थाई बाँध बना लेने का करिश्मा किया है, जिनसे उस क्षेत्र के १०० घरों को पानी मिल रहा है।

गनपत सिंह गोंड़ मूलत: मंडला निवासी है। बहन की शादी होने पर वह भी साथ खडगवाँ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत जरौंधा आ गया। फिर अपने परिवार के साथ मनेंद्रगढ़ आकर वन- भूमि पर झोपड़ी बनाकर रहने लगा। तराई में पानी की काफी समस्या थी। वहाँ न कोई हैंडपंप था और न ही आसपास कहीं नदी और कुँआ। घर से कुछ ही दूरी पर पहाड़ के किनारे से एक बरसाती नाला बहता था। गनपत सिंह गौंड केवल अपनी ही नहीं, सबकी भलाई सोची और नाले पर अस्थाई बाँध बनाने के काम में अकेले ही जुट गया। कुछ समय तक तो लोग उसका खूब मजाक उड़ाते थे, लेकिन गनपत सिंह अविचलित अपने काम में जुटा रहा और वह कर दिखाया जिसकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते थे। आज जिन सैकड़ों घर के लोगों की पानी की समस्या दूर हो गयी है, वह उसकी प्रशंसा के पुल बाँधते नहीं थकते।

दो बार मिला सम्मान
गनपत को उसके उल्लेखनीय कार्य के लिए अब तक दो बार सम्मानित किया जा चुका है। २०१३ में हुए सार्वजनिक ध्वजारोहण कार्यक्रम में उसे शॉल, श्रीफल और नकद राशि देकर सम्मानित किया गया तथा दूसरी बार नगर की हास्य सेवा समिति ने सम्मान स्वरूप ५०० रुपए और श्रीफल दिया।

प्रशासन ने समझा महत्त्व
पहले तो बुजुर्ग गनपत के कार्यों को प्रशासन ने अतिक्रम माना और एसडीएम साहब बाँध तोड़ने के लिए मौके पर पहुँचे थे। लेकिन जब उसके पुरुषार्थ को देखा तो अपने कार्यालय बुलाकर गनपत की हौसला अफ़जाई की, उसे वन अधिकार पत्र भी देने की बात कही, साथ ही पक्का बाँध बनवाने का आश्वासन भी दिया। गतवर्ष तत्कालीन वनमंडलाधिकारी एस. वेंकटाचलम ने भी वन भूमि का अधिकार पत्र दिए जाने का आश्वासन दिया।


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