Published on 2017-12-15

दिंनाक : 15 से 18 दिसंबर स्थान :- साइंस कॉलेज मैदान,रायपुर (छत्तीसगढ़ )रायपुर में 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन लाखों श्रद्धालु होंगे शरीक रायपुर. चार दिवसीय 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ शुक्रवार को शुरू हो रहा है।2100 सौ की संख्या में गायत्री परिवार की माताएं और बहनें आमापारा तालाब में कलश पूजन करेंगी। इसके बाद वरुण देव का आववान कर कलश यात्रा की शुरुआत की जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले 1999 में साइंस कॉलेज मैदान में गायत्री परिवार के नेतृत्व में संस्कार यज्ञ हुआ था। तब प्रदेश के हजारों बच्चों व युवाओं ने भारतीय संस्कार की शिक्षा ग्रहण की थी। 


अब 18 साल बाद फिर उसी मैदान में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का चार दिवसीय आयोजन 15 से 18 दिसंबर तक होने जा रहा है। इसमें राज्यपाल बलरामजी दास टंडन, मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत व अन्य मंत्रीगण भी आहुति देंगे। प्रतिदिन अलग-अलग तरह के संस्कारों में प्रदेशभर से लाखों लोग शामिल होंगे।

गायत्री मंत्र का होगा गुंजायमान श्रद्घा संवर्धन गायत्री महायज्ञ के इस चार दिनों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। वहीं कलश शोभायात्रा लक्ष्मी नारायण मंदिर आमापारा से शुरू होकर समता कॉलोनी, चैबे कॉलोनी, गीता नगर होते साइंस कॉलेज मैदान में पहुंचेगी। महायज्ञ के संरक्षक श्याम बैस ने बताया कि हिन्दू रीति के अनुसार जब भी कोई पूजा होती है, तब मंगल कलश की स्थापना अनिवार्य होती है।

बड़े अनुष्ठान यज्ञ आदि में पुत्रवती सधवा महिलाएं बड़ी संख्या में मंगल कलश लेकर शोभायात्रा में निकलती हैं। कलश यात्रा के समय सृजन और मातृत्व दोनों की पूजा एक साथ होती है। समुद्र मंथन की कथा बहुत प्रसिद्घ है। समुद्र जीवन और तमाम दिव्य रत्नों और उपलब्धियों का स्रोत है।

वहीं इस दौरान लगभग 11 रथ और बैंडबाजा कलश यात्रा के साथ चलेगा। इस दौरान गायत्री मंत्र भी चलता रहेगा। वातावरण गायत्री मंत्र से गुंजायमान होगा। 10 हजार परिजन प्रतिदिन देंगे आहुति 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ व गायत्री परिवार से जुडे दीनानाथ शर्मा ने बताया कि प्रदेशभर से लगभग 10 हजार परिजन प्रतिदिन वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ में सामूहिक आहुति देंगे। यज्ञ स्थल तक पहुंचने के लिए वेटिंग लाइन बनी होगी। कोई भी भक्त बीच से नहीं घुस पाएगा। जैसे-जैसे यज्ञ स्थल खाली होता जाएगा, वैसे-वैसे वेटिंग में लगे भक्तों को आगे बढ़ाया जाएगा।

सभी वर्ग के लोग महायज्ञ में शामिल हो रहे हैं, क्योंकि यह किसी एक वर्ग का महायज्ञ नहीं है। सभी समुदाय के जनकल्याण के लिए महायज्ञ है।

चालीस स्टॉल में प्रदर्शनी व्यसन मुक्ति, आदर्श ग्राम योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सत-साहित्य, विचार क्रांति पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। बच्चों व युवाओं के लिए नैतिक शिक्षा पर आधारित कार्यक्रम होंगे। साथ ही धार्मिक पुस्तक, व्यंजन जैसे
40 स्टॉल लगेंगे। इस दौरान कई विषय विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। वहीं गुरूवार को महायज्ञ स्थल पर भव्य तरीके से तैयार चलती रही।

यज्ञांजलि स्मारिका का प्रकाशन चार दिन तक चलने वाले कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए स्मारिका यज्ञांजलि का प्रकाशन भी किया जाएगा। टंस्ट के मीडिया प्रभारी आरके शुक्ला ने बताया कि इसमें शक्ति कलश की विराट यात्रा, दीप यज्ञों की श्रृंखला, नारी जागरण, गौ संवर्धन, प्रज्ञापीठों की स्थापना, पर्यावरण संवर्धन, युवा क्रांति वर्ष, बाल संस्कार शाला का महत्व का समायोजन किया जाएगा।

योग प्रशिक्षक देंगे योग टिप्स इस चार दिवसीय महायज्ञ में सिर्फ यज्ञ ही नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार, प्रवचन के साथ योग से कैसे रहे निरोग के बारे में बताया जाएगा। जिला समन्वयक की माने तो अनुष्ठान का उद्देश्य चैतरफा मानव कल्याण के विकास के लिए है। जो सदियों से महायज्ञ के जरिये गायत्री परिवार द्वारा किया जा रहा है। 

पं रविशंकर शुक्ल विवि के योग अध्ययन शाला विभाग के छात्र-छात्राएं योग टिप्स देंगे, जिसकी शुरुआत गायत्री परिवार ने सालों पहले की थी।युवा जागृति सम्मेलन 16 दिसंबर को सुबह 6 से 7.30 बजे तक सामूहिक जप, ध्यान, योग व्यायाम, प्राणायाम कराया जाएगा। सुबह 8.30 से 1 बजे तक देवपूजन व 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में आहुति। दोपहर में कार्यकर्ता गोष्ठी, युवा जागृति सम्मेलन व शाम को संगीत, प्रवचन व गुरुदेव का संदेश दिया जाएगा।


महिला जागृति सम्मेलन 17 दिसंबर को सुबह 7 बजे से दोपहर तक यज्ञ हवन व दोपहर 1.30 से 4 बजे तक महिला जागृति सम्मेलन व विभिन्न संगठनों का सम्मेलन होगा। शाम को 11 हजार दीप प्रज्ज्वलित होंगे। 18 दिसंबर को सुबह 8.30 से 2 बजे तक गायत्री महायज्ञ के साथ पुंसवन संस्कार, मुंडन संस्कार, अन्न प्रासन संस्कार, विद्यारंभ संस्कार, नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, विवाह संस्कार, दीक्षा संस्कार शामिल हैं। पूर्णाहुति के साथ टोली की विदाई व प्रसाद वितरण के साथ समापन होगा।


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