Published on 2017-12-18

नारी समाज निर्माण की धुरी : डॉ. पण्ड्याजी
हरिद्वार १८ दिसम्बर।

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चल रहे पाँच दिवसीय नारी चेतना शिविर का आज समापन हो गया। इस शिविर में राजस्थान की कोटा, जयपुर, उदयपुर सहित बारह जिलों की चयनित बहिनें शामिल रहीं।

अपने संदेश में गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि हमारे ऋषियों ने नारियों को समाज निर्माण की धुरी माना है। सुसंस्कारी नारी ही परिवार, समाज के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा पाती हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के जनक पूज्य आचार्यश्री ने २१वीं सदी को नारी सदी कहा है। गायत्री परिवार के करोड़ों परिजन विभिन्न कार्यक्रमों के साथ समाजोत्थान के कार्य में जुटे हैं। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदीजी ने कहा कि जहाँ नारी सुशिक्षित, सुसंस्कारी एवं स्वावलंबी होगी, वहीं परिवार, समाज व राष्ट्र विकास की दिशा में उत्तरोत्तर प्रगति करेगा। उन्होंने प्रतिभागियों को स्वावलंबी बनने के विभिन्न सूत्रों की जानकारी दी।
 
शिविर के समापन सत्र को संबोधित करते श्रीमती शेफाली पण्ड्याजी ने कहा कि किसी भी समाज, देश की प्रगति एवं समृद्धि वहाँ की नारियों के विकास के स्तर पर निर्भर करता है। देश में व्याप्त कुप्रथाओं को मिटाने के लिए बहिनों को जगाने की आवश्यकता है। बहिनें जागेंगी, सशक्त होंगी, तो देश मजबूत होगा। श्रीमती पण्ड्याजी ने आत्म निर्भर एवं समाज कल्याण के लिए आगे आने हेतु नारियों का आवाहन किया। गायत्री विद्यापीठ की व्यवस्था मण्डल की प्रमुख श्रीमती पण्ड्याजी ने नारियों को दहेज प्रथा, कुरीति उन्मूलन, बाल विवाह जैसे बुराइयों को मिटाने के लिए स्वयं से शुरुआत करने की बात कही, तो वहीं बालक-बालिकाओं में समान रूप से व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया।

महिला मण्डल की श्रीमती भारती नागर ने बताया कि पाँच दिन तक चले इस शिविर में राजस्थान के कोटा, जयपुर, उदयपुर, अजमेर, सीकर, जोधपुर सहित बारह जिलों की चयनित बहिनें  शामिल रहीं। शिविर में पूर्णिमा अग्रवाल, सुशीला अनघोरे, श्यामा, नीलम मोटलानी, ज्योत्सना मोदी, शालिनी आदि बहिनों ने प्रतिभागियों को परिवार को सुसंस्कारी बनाने, प्रतिभा परिष्कार करने से लेकर कुटीर उद्योग तक के सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए।


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