Published on 2017-12-20

(१ से ४ नवम्बर २०१७)
मेवाड़ की आन, बान, शान की रक्षा की शपथ ली
५०० से अधिक लोगों ने समयदान का संकल्प लिया
कलेक्टर श्री पी.सी. बेरवाल एक स्वयंसेवक के रूप में प्रत्येक दिन कार्यक्रमों में उपस्थित रहे
२१ विशिष्ट विभूतियों का सम्मान किया गया

राजसमंद में आयोजित देवसंस्कृति पुष्टिकरण लोक आराधन २५१ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ ने मेवाड़ की गौरवशाली संस्कृति की याद दिला दी। कलेक्टर परिसर की भव्य यज्ञशाला में हल्दीघाटी अश्वमेध यज्ञ की फिज़ां दिखाई दे रही थी। अंतर इतना ही था कि पहले लाखों की भीड़ थी और अब संकल्पित साधक मेवाड़ की संस्कृति को फिर से बुलंद करने की शपथ ले रहे थे।

कार्यक्रम सम्पन्न कराने शांतिकुंज से श्री केसरी कपिल जी एवं श्री दिनेश पटेल की टोली पहुँची थी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि नीति, मर्यादा और संस्कृति की आन, बान, शान की रक्षा के लिए मेवाड़ के शूरवीरों का पराक्रम विश्ववन्द्य है। आज किसी क्षेत्र विशेष पर नहीं, सारी मानवता पर छाये संकट से रक्षा के लिए हमें वही पराक्रम फिर दोहराना है।

आज संघर्ष किसी व्यक्ति से नहीं, वृत्तियों से है। आवश्यकता समाज को भोगवादी संस्कृति, मूढ़ मान्यताओं, कुरीतियों से उबार कर त्याग और बलिदान की संस्कृति को पुन: प्रतिष्ठित करने की है। माता भगवती गायत्री की उपासना ही इसके लिए आवश्यक प्रेरणा और शक्ति प्रदान करेगी।

इस महायज्ञ में २५ से ३० हजार लोगों ने आहुतियाँ प्रदान की। दो दिन में दीक्षा एवं अन्य संस्कार हजारों की संख्या में हुए।

कलश यात्रा :
प्रथम दिन प्रेरक झाँकियाँ, हजारों कलश, १०८ वेद धारकों सहित कलश यात्रा निकली। ५००० नर- नारी शामिल हुए। बालकृष्ण स्टेडियम काँकरोली से पुष्टिमार्ग के तृतीय पीठाधीश्वर युवराज पू. वेदान्त राजा एवं नगर परिषद् सभापति ने कलशों का पूजन कर इसका शुभारंभ किया। यज्ञस्थल पर पहुँचने पर श्री हरिओम सिंह राठौड़ सांसद एवं जिला कलक्टर श्री पी.सी. बेरवाल ने किया ।।

विभूतियों का सम्मान :
२ नवम्बर को देवसंस्कृति पुष्टिकरण लोक आराधन संगोष्ठी में मेवाड़ क्षेत्र के संत, महामण्डलेश्वर एवं संस्था- संगठनों के सूत्र पुरुषों ने भाग लिया। ध्यान योगी संत श्री शुभकरण जी महाराज का विशेष सान्निध्य रहा। सभी ने सृजन सेवा में गायत्री परिवार के साथ रहकर कार्य करने का आश्वासन दिया। २१ विभूतियों का सम्मान किया गया।

मेवाड़- मंथन
३००० गाँव- कस्बों की प्रव्रज्या
इस महान यज्ञ के माध्यम से समस्त मेवाड़ (जिला- राजसमन्द, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा एवं पूर्वी पाली क्षेत्र) के गाँव- गाँव जाकर जनचेतना जगायी गयी। ३००० से अधिक ग्राम- कस्बों में गोष्ठी, यज्ञ, दीपयज्ञ जैसे कार्यक्रमों के साथ ग्राम प्रवृज्या हुई। इन सभी गाँवों में संकल्पि साधकों द्वारा मंत्रलेखन एवं चालीसा पाठ किये गये। २००० से अधिक देवस्थानों की जल- रज का पूजन किया गया। २२ अक्टूबर को हुए यज्ञशाला के भूमि पूजन समारोह में इन देवस्थानों की पवित्र जल- रज को ३१ कलशों में गाजे- बाजे के साथ लाया गया। जिला कलक्टर एवं संतों ने इसका भव्य स्वागत किया।

मातृशक्ति श्रद्धांजलि महापुरश्चरण
३००० गाँव- कस्बों की प्रव्रज्या
देव संस्कृति पुष्टिकरण अभियान के अंतर्गत पूरे राजस्थान में गाँव- गाँव, घर- घर शक्तिकलशों की स्थापना करायी जा रही है। इनके सान्निध्य में आगामी नौ वर्षों तक नौ- नौ दिवसीय सामूहिक साधना अनुष्ठान किये जायेंगे। हर नौ दिन के बाद शक्ति कलश नये घर ले जाया जायेगा।

राजसमंद के महायज्ञ में धनवन्तरी त्रयोदषी से दीपावली तक २४०० शक्ति कलषों की स्थापना सामूहिक जप एवं यज्ञीय वातावरण में की गई। इन्हें यज्ञोपरांत मेवाड़ के सभी जिलों के गाँव- गाँव में ले जाया गया। घर- घर सामूहिक साधना अनुष्ठान आरंभ हो गये।

देव संस्कृति दिग्दर्शन :

लोक आराधन प्रदर्शनी में युग निर्माण आन्दोलन के साथ मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को दर्शाया गया था। इस क्षेत्र के शूरवीर, बलिदानी, वीरांगना देवियों, संस्कृति की रक्षा के लिए आत्मोत्सर्ग करने वाले बालकों और पशु- पक्षियों की वीरगाथा का इस प्रदर्शनी में सजीव चित्रण किया गया था।

राजसमन्द झील पर सामूहिक तर्पण
कार्तिक पूर्णिमा, ४ नवम्बर को राजसमंद झील के नौ चौकी पाल पर हजारों नर- नारियों ने एक साथ देव तर्पण, ऋषि तर्पण, प्रकृति तर्पण, पितृ तर्पण एवं शहीदों, धर्म- राष्टः के लिए दिवंगत हुतात्माओं के तर्पण किए ।।

दीप महायज्ञ : तीन वर्षीय अनुयाज के संकल्प
ढाई लाख देव परिवार बनाना
  • हर गाँव की प्रव्रज्या,
  • हर गाँव में वृक्षारोपण,
  • हर विद्यालय में भा. सं. ज्ञान परीक्षा
  • नदियों के किनारे सघन वृक्षारोपण

माननीय श्री गुलाबचन्द कटारिया- गृहमंत्री राजस्थान, श्रीमती किरण माहेश्वरी उच्च शिक्षा मंत्री राजस्थान एवं श्री पी़सी़ बेरवाल जिला कलक्टर राजसमन्द की गरिमामय उपस्थित में दीप महायज्ञ सम्पन्न हुआ। २४००० प्रज्वलित दीपों की साक्षी में मेवाड़ घोषणा पत्र जारी किया, देवसंस्कृति पुष्टिकरण के लिए ३ वर्षीय अनुयाज के सामूहिक संकल्प लिये गये।


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