Published on 2017-12-25
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गोरखपुर सहित कई जनपदों के १५० से अधिक प्रधानाचार्य एवं प्रवक्तागण शामिल

हरिद्वार २४ दिसम्बर।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का आज शुभारंभ हुआ। शिविर का शुभारंभ शांतिकुंज के वरिष्ठजन एवं अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया। शिविर में गोरखपुर एवं निकटवर्ती कई जनपदों के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं प्रवक्तागण शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रचनात्मक प्रकोष्ठ के समन्वयक श्री केदार प्रसाद दुबे ने कहा कि कौशल का विकास और व्यक्तित्व का परिष्कार शिक्षा के ये दो पहलू हैं और इन्हें विकसित करने में शिक्षकों की महती भूमिका होनी चाहिए। श्री दुबे ने कहा कि शिक्षा एक प्रतिपादन है और उसका मूर्त रूप है शिक्षक। छात्रों का व्यक्तित्व सुधारने व उभारने में शिक्षकों के साथ अभिभावकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि इन दिनों शिक्षा को स्वावलंबन एवं सुसंस्कारिता संवर्द्धन के लिए उपयोगी बनाने की आवश्यकता है। समय- समय पर छात्र- छात्राओं के सामयिक समस्याओं का निराकरण करते रहने से ही विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ आंतरिक सद्गुणों के विकास के लिए विविध उपायों की जानकारी दी। श्री दुबे ने विद्यार्थियों में नैतिकता के विकास के लिए बालसंस्कार शाला से जुड़ने पर बल दिया।

श्री सदानंद अम्बेकर ने युवाक्रांति वर्ष के अंतर्गत शांतिकुंज द्वारा चलाई जा रही विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज एक ऐसा प्रशिक्षण केन्द्र है, जहाँ से नैतिक, बौद्धिक व आध्यात्मिक पथ पर बढ़ने वाले व्यक्ति को प्रकाश मिलता है।

शिक्षक गरिमा शिविर में गोरखपुर एवं निकटवर्ती कई जनपदों के विभिन्न विद्यालयों, इंटर कॉलेजों के १५० से अधिक प्रधानाचार्य एवं प्रवक्तागण सम्मिलित हैं। तीन दिन तक चलने वाले इस प्रशक्षिण शिविर में शांतिकुंज के विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों के विकास में चलाये जाने वाले विविध कार्यक्रमों की सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।


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