Published on 2017-12-27

अवसर पहचानें, संभावनाओं को साकार करें-डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी

२६ एवं २७ जनवरी २०१८ की तारीखों में नागपुर में सम्पन्न होने जा रहे 'युवा क्रांति वर्ष २०१७-२०१८'   के समापन समारोह के प्रति पूरे देश में जबरदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है। देश के कोने-कोने में युवा क्रान्ति का संदेश दे रहे 'युवा क्रान्ति रथ' जहाँ भी जाते हैं वहाँ लोगों में नयी उमंग और उत्साह का संचार कर रहे हैं। देश की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखने जा रहे इस कार्यक्रम की नागपुर भी बड़े उत्साह के साथ प्रतीक्षा कर रहा है। डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, प्रतिकुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय के नागपुर प्रवास में इसकी बानगी स्पष्ट दिखाई दी।  

नागपुर। महाराष्ट्र
डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी नागपुर के प्रबुद्ध नागरिकों एवं राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े विद्यार्थियों के लिए आयोजित सेमीनार के मुख्य वक्ता थे। च्मानवीय उत्कर्ष' विषय पर आयोजित यह सेमीनार डॉ. वसंतराव देशपांडे सभागार, सिविल लाइन्स में में २८ नवम्बर २०१७ को आयोजित हुई। नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.पी. काणे इसके मुख्य अतिथि और कुलसचिव श्री पूरण मेश्राम विशिष्ट अतिथि थे। प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान, भारत सरकार के उपक्रमों, शासकीय, अर्धशासकीय निकायों, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विद्वानों, सामाजिक संगठनों, एनएसएस, सीआईएसएफ, नीरी आदि संस्थानों के गणमान्यों ने सेमीनार का लाभ लिया।  

अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा नायक डॉ. चिन्मय जी ने अपने उद्बोधन में हर व्यक्ति में विद्यमान दिव्य संभावनाओं की बड़ी प्रभावशाली चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन संभावनाओं को साकार करने के अवसर हर किसी के पास आते हैं। जो अवसर को पहचान लेते हैं वे स्वयं उत्कृष्ट जीवन जीते और अन्य सैकड़ों-हजारों के पथ प्रदर्शक-मार्गदर्शक बनते हैं। ऐसे ही लोग महापुरुष कहलाते और इतिहास के पन्नों पर अमर होते देखे जाते हैं। शेष तो पेट-प्रजनन प्रधान पशुवत जीवन जीते और अपने ही दु:खों का रोना रोते देखे जाते हैं।

शांतिकुंज प्रतिनिधि ने परिवर्तन की वर्तमान वेला को ऐसा ही एक दिव्य अवसर बताया। उन्होंने युग सृजेताओं से साहसपूर्वक आगे आने और सूक्ष्म जगत के दिव्य अनुदानों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

कार्यकर्त्ताओं को संदेश
डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी का प्रथम कार्यक्रम गायत्री शक्तिपीठ नागपुर पर 'दिया' नागपुर के नव प्रवेशी बच्चों के बीच था। बच्चों ने उनसे अपनी जिज्ञासाओं के समाधान प्राप्त किये। मिशनरी कार्य एवं दैनंदिन कार्यों के बीच सामंजस्य कैसे बिठाया जाय।
 
द्वितीय कार्यक्रम महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आये कार्यकर्ताओं के बीच था। परम पूज्य गुरुदेव के मार्मिक संस्मरणों के माध्यम से अभिभूत करते हुए उन्हें युग सृजेता सृजन संकल्प समारोह को 'न भूतो न भविष्यति' बनाने की प्रेरणा दी।


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