शांतिकुंज व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ने अपने स्वयंसेवकों एवं विद्यार्थियों में जिस तरह की सेवाभावना के बीज बोये हैं, वह काबिले तारीफ है। ये स्वयंसेवक जिस किसी मोर्चे में लग जाते हैं, वहाँ सफलता प्राय: सुनिश्चित हो जाती हैं।

मई के अंतिम सप्ताह से ही चारधाम यात्रियों की पीड़ा को बाँटने हेतु शांतिकुंज ने पहल प्रारंभ कर दी। अब तक शांतिकुंज द्वारा हो रहे संचालित ९ शिविरों में करीब एक लाख लोगों ने इसका लाभ उठाया है। ये यात्री गुजरात, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, आसाम, तमिलनाडु, पं. बंगाल सहित देश २६ राज्यों के हैं।

केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह से बचकर आये रीवा मप्र के मनसुख लाल वर्मा, हजारीबाग झारखंड की श्रीमती ऊषा देवी कहते हैं कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अनिल गुप्ता, विमल, अंकित, जयप्रकाश, आनंद वर्मा, हर्षित जायसवाल एवं उनकी टीम ने १६ किमी पहाड़ पार कर हम लोगों तक भोजन पैकेट पहुँचाये हैं। टीम ग्राम चन्द्रापुरी, जिला रुद्रप्रयाग के प्रधान संतोष कुमार को नियमित रूप से ७०० सौ भोजन के पैकेट पहुंचा रही हैं। देसंविवि के राहुल सैनी, सक्षम, आलोक, मनीष, देवेन्द्र कुमार, अरविन्द, आनंद आदि अगस्त्यमुनि  में संचालित नि:शुल्क भोजनालय में यात्रियों की सेवा जुटे हैं।

वहीं शांतिकुंज आपदा राहत शिविर के अनुसार रविवार देर रात केदारनाथ से करीब ५६३ लोगों का एक जत्था शांतिकुंज पहुँचा। ये यात्री मप्र के विदिशा, शिवपुरी तथा झारखंड के हजारीबाग, रामगढ़ जिले के मूल निवासी हैं। अब तक शांतिकुंज राहत शिविर में करीब चार हजार यात्री पहुंच चुके हैं। इन्हें उनके गंतव्य स्थानों तक गुजरात, मप्र व राजस्थान सरकार के सहयोग से हवाई, रेल व सड़क मार्ग से भेजा गया है। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने बताया कि पीड़ितों की सेवा करने के लिए पूरा गायत्री परिवार तत्पर है। शांतिकुंज के सभी स्वयंसेवक पीड़ितों के आंसू पोंछने के लिए २४ घंटे सेवारत हैं। १५०० से अधिक पीड़ितों को शांतिकुंज की ओर से आर्थिक सहयोग दिये जा चुके हैं। आवश्यतानुसार यह क्रम आगे भी जारी रहेगा।

http://video.awgp.org/video.php?id=3025">  गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पड्याजी ने इन तीर्थ यात्रिओं को रवाना करते हुए कहा की शांतिकुंज उनका अपना घर है।  इन दिनों उत्तराखंड जिन प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, उसमें गायत्री परिवार अपनी हर संभव मदद कर रहा है। अभी तक फंसे हुए तीर्थ यात्रिओं, सेवारत मिलेट्री के जवान आदि सहयोगिओं को दिनभर की आवश्यकताओं के अनुसार सामान पहुँचा रहा है। जिसमे ७५०००  से अधिक भोजन पैकेट्स, कपड़े आदि प्रमुख है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व गुजरात,  राजस्थान, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ आदि के तीर्थयात्रिओं के दल को भी ऐसे ही सकुशल रवाना किया गया है।


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