अश्वमेध गायत्री महायज्ञ के लिए आचार्यों का दल रवाना

Published on 2017-12-31
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राष्ट्र को समर्थ बनाने की दिशा हो रहा है यज्ञानुष्ठान : डॉ. पण्ड्याजी

हरिद्वार ३१ दिसंबर।
देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान के तहत चलाये जा रहे ४४वाँ अश्वमेध गायत्री महायज्ञ, मंगलगिरि (आंध्रप्रदेश) के लिए आज आचार्यों का दल रवाना हुआ। इसमें गणाध्यक्ष, अथर्व (आचार्य) सहित होता (संगीतज्ञ) शामिल हैं। गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी एवं श्रद्धेया शैल दीदी जी मंगलतिलक व रुद्राक्ष की माला पहनाकर विदा किया।
 
दल के विदाई के अवसर पर श्रद्धेय डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि गायत्री परिवार के सौजन्य से देश भर में आश्वमेधिक आयोजन हो रहे हैं। जयपुर (राजस्थान) से १९९२ से   प्रारंभ हुई अश्वमेध शृंखला का यह ४४वाँ आश्वमेधिक आयोजन है। गायत्री परिवार ने देश-विदेश में अश्वमेध गायत्री महायज्ञ के माध्यम से युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण समाज को इन दिनों सकारात्मक सोच की जरुरत है। भारतीय संस्कृति की जड़ों को आध्यात्मिक अनुष्ठानों से सींचकर और अधिक मजबूत बनाना है। इस दिशा में शांतिकुंज के निर्देशन में देश-विदेश में फैला गायत्री परिवार लंबे समय से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंगलगिरि भगवान् विष्णु जी का क्षेत्र माना जाता है और यह कृष्णा नदी के तट पर बसा एक खुबसूरत शहर है।

कार्यक्रम विभाग के प्रभारी श्री आनंद मिश्र ने बताया कि आचार्यों के दल का नेतृत्व  शांतिकुंज मनीषी श्री वीरेश्वर उपाध्याय कर रहे हैं। दल में उनके अलावा सात आचार्य एवं सात संगीतज्ञ शामिल हैं। यह दल ५ से ८ जनवरी के बीच होने वाले आश्वमेधिक कार्यक्रमों का वैदिक मंत्रों के साथ संचालन करेगा। वहीं ९ सदस्यीय मीडिया टीम श्री भूपेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में कार्य करेगी।

उधर अश्वमेध यज्ञ में जुटे सूत्रों के अनुसार शांतिकुंज से पहुँचे इंजीनियरों की देखरेख में ५५१ कुण्डीय यज्ञशाला, प्रदर्शनी, प्रवचनहॉल, भोजनालय आदि का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक से कई हजार स्वयंसेवी नर-नारी पहुंच गये हैं, जो दिन-रात सेवा कार्य में जुटे हैं। अश्वमेध महायज्ञ का शुभारंभ के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली जायेगी। इसमें दक्षिण भारत के अनेक गणमान्य नागरिक शामिल होंगे। 


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