Published on 2018-01-09
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एमबीए, एमएससी, एमए, बीएड, बीएससी, बीए व सर्टीफिकेट पाठ्यक्रमों के 380 छात्र- छात्राओं की 132 टोलियाँ परिव्रज्या पर निकली हैं। वे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, अरुणाचल, प. बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, केरल, गोवा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान प्रांतों एवं नेपाल के ढाई सौ से अधिक शहर- कस्बों में 1000 से अधिक कार्यक्रम करेंगी।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के 380 छात्र- छात्राओं की 132 टोलियाँ 21 एवं 22 दिसम्बर को देश भर के ढाई सौ से अधिक जिलों के लिए रवाना हुर्इं। ये विद्यार्थी अपने परिवीक्षा काल में योग, स्वास्थ्य, युवा जागरण, नारी जागरण सहित विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न करायेंगे।

कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने टोलियों की रवानगी से पूर्व विदाई उद्बोधन दिया। इसमें उन्होंने विद्यार्थियों को ‘बी बॉर्न अगेन’ का मंत्र देते हुए इंटर्नशिप को एक नये जन्म जैसा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि परिवीक्षा में जहाँ विद्यार्थियों को अपने सीखे हुए ज्ञान का व्यावहारिक प्रयोग करने का विलक्षण अवसर मिलता है, वहीं समाज से भी हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। परिव्रज्या जीवन को परिपक्व बनाती है। दुनिया बदलेगी, तो परिव्राजकों से ही बदलेगी।

श्रद्धेय डॉ. साहब ने अपने विद्यार्थियों को अपने इष्ट का संदेशवाहक बनने की प्रेरणा दी। ऐसा करने से आपकी शक्तियाँ सौ गुनी हो जायेंगी, वहीं अपना चरित्र, चिंतन और व्यवहार अपने इष्ट के अनुरूप बनाये रखने की नैतिक जिम्मेदारी भी आप पर होगी।


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