Published on 2018-01-09

युवा क्रांति वर्ष युवाओं को उनके युग निर्माणी दायित्वों का बोध कराने का एक एतिहासिक अवसर सिद्ध हुआ। देश- विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएँ दे रहे शांतिकुंज के कार्यकर्त्ताओं के बच्चों (इनमें से बहुत से बच्चों के तो बेटे- बेटी भी वयस्क हो चुके हैं) में भी अपनी सामर्थ्य का श्रेष्ठतम उपयोग करने की स्फुरणा हुई। गायत्री विद्यापीठ, शांतिकुंज में पढ़ने वाले ये सभी बच्चे ‘नवयुग दल’ के सदस्य हैं। इस नवयुग दल ने अपनी सक्रियता को नयी धार और सही दिशा देने के लिए सन् 2016 में शांतिकुंज में एक सम्मेलन रखा था, जो बहुत ही आनन्ददायक, उत्साहवर्धक सिद्ध हुआ था। 23 से 25 दिसम्बर 2017 की तारीखों में नवयुगदल का पुन: सम्मेलन हुआ।

नवयुग दल, शांतिकुंज का विशिष्ट सम्मेलन - स्नेह की डोर सदा मजबूत रखना
आप सभी को अपने बीच पाकर मन गद्गद हो जाता है। स्नेह की डोर को सदा मजबूत बनाये रखना। पीड़ितों व जरूरत मंद लोगों की सेवा करते रहना। पीड़ितों की सेवा करना और हतोत्साहितों को नया हौसला देना, यही ईश्वर की कृपा पाने का सबसे सुगम मार्ग है।
• आदरणीया शैलदीदी

आप शांतिकुंज के दूत हैं
आप सब शांतिकुंज के दूत हैं। अपने आत्मबल और आत्मविश्वास के सहारे अपने साथियों को आध्यात्मिक जीवन में ढालने का प्रयास करते रहें, उनकी प्रतिभा और ऊर्जा को समाज के नवनिर्माण में लगाते रहें। परम पूज्य गुरुदेव, परम वंदनीया माताजी का विशेष संरक्षण- अनुदान आपके लिए सुरक्षित है।
 • आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी

प्यार ही मूल मंत्र है
परम पूज्य गुरुदेव, परम वंदनीया माताजी की अपने बच्चों से विशेष आशाएँ हैं। जिस प्यार से उन्होंने हमें अपना बनाया, प्यार बाँटने का वही सूत्र युग निर्माणी संकल्पों को साकार करने का मूल मंत्र है। उस प्यार के अभिसिंचन के साथ भूले- भटकों को राह दिखाओ, पीड़ित और जरूरतमंदों में नवप्राणों का संचार करो।
• आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी

युवा क्रांति वर्ष के लक्ष्य के अनुरूप नवयुगदल का सम्मेलन युवा पीढ़ी को मिशन की धारा में सक्रिय और गतिशील करने का विशिष्ट अवसर था। कार्यकर्त्ताओं के बेटे- बहू, बेटी- दामाद और उनके बच्चे सभी इस सम्मेलन में आये। अत्यंत स्नेहासिक्त वातावरण में अपने वरिष्ठ अभिभावकों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। पुरानी स्मृतियाँ ताजा हुर्इं। अपनी मिशनरी गतिविधियों की जानकारियों का आदान- प्रदान किया और समय की माँग के अनुरूप अपनी सक्रियता को दिशा देने के संकल्प उभरे। परम पूज्य गुरुदेव द्वारा बताये ‘हम बदलेंगे- युग बदलेगा’ एवं 1 से 5 और 5 से 25 होने जैसे सूत्रों को चरितार्थ कर समाज के समक्ष अपना आदर्श प्रस्तुत करने के संकल्प लिये गये। नवयुग दल के सदस्य इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए देश- विदेश से आये थे।


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