Published on 2018-02-03
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१०८ कुण्डीय श्रद्धासंवर्धन गायत्री महायज्ञ, भोपाल

भोपाल। मध्य प्रदेश

भोपाल के बीएचईएल मैदान पर १६ से १९ दिसम्बर की तारीखों में १०८ कुण्डीय श्रद्धा संवर्धन महायज्ञ सम्पन्न हुआ। इस विशाल कार्यक्रम का २५ से ४० हजार लोगों ने लाभ लिया।

देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी भी इस कार्यक्रम में पहुँचे। उनकी उपस्थिति ने युवाओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। दीपयज्ञ के अवसर पर उपस्थित जनमानस में लोकमंगल की भावनाओं का संचार किया। उन्होंने कहा कि हम सूर्य बनकर ब्रह्माण्ड में प्रकाश न बिखेर सकें तो भी एक दीपक बनकर सीमित परिधि को आालोकित कर ही सकते हैं।

डॉ. चिन्मय जी ने उपस्थित जनमानस को गायत्री उपासना से आत्मबल प्राप्त करने और नशे जैसी कुरीतियों को त्यागने की प्रेरणा दी। लगभग १००० लोगों ने गुरुदीक्षा ली।

मित्तल कॉलेज, भोपाल में उद्बोधन
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय जी १८ दिसम्बर को मित्तल कॉलेज, भोपाल में मानवीय उत्कर्ष विषय पर उद्बोधन देने के लिए आमंत्रित थे। वहाँ उन्होंने छात्र- छात्राओं, प्राध्यापकों एवं कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने वर्तमान समय की विसंगतियों के बीच भी विकास के विविध आयामों को सहजता से खोलने के व्यावहारिक तरीके सिखाये।

विदिशा में प्रखर प्रज्ञा, सजल श्रद्धा की स्थापना
डॉ. चिन्मय जी १८ दिसम्बर की प्रात: गायत्री शक्तिपीठ विदिशा पहुँचे। उनके द्वारा वहाँ नवनिर्मित गुरुस्मारक प्रखर प्रज्ञा, सजल श्रद्धा की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। इस स्थापना के प्रयोजन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इन स्मारकों में परम पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीया माताजी की परम चेतना की जीवन्त स्थापना हुई है, जो हमें बार- बार स्मरण कराती रहेगी कि गुरुसत्ता द्वारा बताये गये आदर्शों पर हमारा विश्वास और भावनाओं में उत्कृष्टता के समावेश का क्रम कहीं कमजोर तो नहीं पड़ रहा।


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