Published on 2018-02-08
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प्रबुद्ध जनों के सम्मेलन में शांतिकुंज प्रतिनिधि आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी का संदेश

झाँसी। उत्तर प्रदेश

सिंधी समाज के हनुमान माने जाने वाले श्री मनोज ख्यानी एवं उनकी टीम ने नगर के प्रकाश रेसिडेंसी में एक विशेष समारोह आयोजित किया। सभी राजनीतिक दलों के मंत्री, विधायक, पार्षद, कार्यकर्त्ता, अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों एवं राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर उभरते जूनियर खिलाड़ियों को इस समारोह में सम्मानित किया गया। वैद्यनाथ प्राणदा (शर्मायु) संस्थान की श्रीमती अनुराधा शर्मा, उत्तर प्रदेश शासन में मंत्री श्री हरगोविंद कुशवाहा (अंतर्बोध शोध संस्थान), पाँच बार से पार्षद रहीं श्रीमती सुशीला दुबे आदि गणमान्य इस समारोह में उपस्थित थे।

शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी को इस प्रतिष्ठित समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि विभूतियाँ परमात्मा की दी हुई अनमोल धरोहर हैं, उनका जितना सदुपयोग किया जाय, उसी अनुपात में परमात्मा के अनुदान- वरदान प्राप्त होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा परम कल्याणकारी मार्ग है, जिससे शाश्वत सुख, संतोष की प्राप्ति होती है। शांतिकुंज प्रतिनिधि ने इस अवसर पर सम्मानित हो रहे सामाजिक कार्यकर्त्ताओं के योगदान की सराहना की और जनमानस को उनका अनुसरण करने की प्रेरणा दी।

आरंभ में गायत्री परिवार की ओर से विशिष्ट अतिथियों को युगऋषि का वाङ्मय 'राष्ट्र समर्थ, सशक्त कैसे बने?' और अन्यों को अपने मिशन की जेबी पुस्तकें प्रदान कर सम्मानित किया गया। शांतिकुंज प्रतिनिधि के उद्बोधन के बाद प्रश्नोत्तरी हुई। अपने सरल- सटीक समाधानों से श्री उपाध्याय जी ने सभी का मन मोह लिया।

आद. श्री उपाध्याय जी अतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त श्री लक्ष्मी व्यायामशाला एवं श्री गायत्री शक्तिपीठ भी गये, अनेक लोगों का युग की माँग के अनुरूप दिशा- प्रेरणा दी। उनके प्रस्तुत प्रवास की सफलता में सिंधी समाज के श्री हरीराम जी श्री सेवक यादव, श्री अनिल हिरवानी, श्री मनोज ध्यानी, अशोक जायसवानी, मुरली हिरवानी, श्री दीनदयाल मिश्रा, श्रीमती पुष्पा मिश्रा, प्रधानाचार्य ग्राम पिछोर का विशिष्ट योगदान रहा।

विद्यालय का गौरव
श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी

आदरणीय श्री उपाध्याय जी अपने झाँसी प्रवास के समय श्री विपिन बिहारी इ. कॉलेज भी गये, जहाँ के वे स्वयं भी विद्यार्थी रह चुके हैं। सभी अध्यापकों ने उन्हें अपने बीच पाकर गौरव की अनुभूति की, माल्यार्पण कर स्वागत किया। वहाँ प्रधानाचार्य जी ने विद्यालय के सूचना पटल पर एक आलेख रखा है। इसमें आध्यात्मिक, राजनीतिक, प्रशासनिक क्षेत्र के चरमोत्कर्ष बिन्दु एवं विद्यालय के गौरवशाली विद्यार्थियों के नामों की सूची है। इस में सर्वप्रथम नाम आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी का और दूसरा श्री ओ.पी. रावत, मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत सरकार का है।

युग निर्माणी मंत्री
श्री हरगोविंद कुशवाहा जी

विशुद्ध रूप से आध्यात्मिक विचारों वाले और युग निर्माण आन्दोलन के प्रति अनन्यभाव रखने वाले श्री हरगोविंद कुशवाहा अपने को मंत्रीजी कहलाने की बजाय अपने को आत्मज्ञानी ध्यानी कल्याणी जी कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं। उन्होंने रामायण हजारों बार पढ़ी है, कंठस्थ है। परम पूज्य गुरुदेव की युग निर्माण योजना में भी रामराज्य स्थापना का वही स्वरूप देखते हैं। इसीलिए गायत्री परिवार के किसी भी कार्य को करने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं।

आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी के नगर आगमन पर श्री कुशवाहा जी ने उन्हें अपने घर आमंत्रित किया और फिर रात्रिकालीन सम्मेलन में भी आये। आद. श्री उपाध्याय जी से प्रेरणा लेकर अब वे जहाँ भी जाते हैं, कंधे पर युग निर्माणी झोला साथ ले जाते हैं। प्रश्नोत्तरी के क्रम में उनकी लोकमंगलकारी भावनाओं से प्रभावित एक वक्ता ने कहा, "अगर हरगोविंद कुशवाहा जी जैसे मंत्री हो जायें तो देश का कायाकल्प होते देर नहीं लगेगी।"

विगत गणतंत्र दिवस पर उन्होंने अपना भाषण जिला प्रशासन की इच्छानुसार नहीं, अपनी आध्यात्मिक आस्थाओं के आधार पर दिया, जिसमें उन्होंने समाज के नैतिक उत्थान की आवश्यकता को प्रमुखता से उकेरा था।


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