Published on 2018-02-10
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मोक्ष क्या है? मुक्ति क्या है? यह प्रश्न हर भारतीय संस्कृति के पक्षधर मानव के मन में सहज ही उठता रहा है, सदा से ही, उसके पृथ्वी पर आविर्भाव के काल से। कई व्यक्ति यह समझते हैं, मोक्ष मरने के बाद-शरीर रूपी बंधन के छूटने के बाद ही मिलता है। इसके लिए वे दान पुण्य आदि अनेकानेक कृत्य करते भी देखे जाते हैं। किन्तु क्या वास्तविक मोक्ष इससे मिल जाता है? ऋषियों की दृष्टि से देखें तो यह एक ऐसी विधा है जिसका अंतर्चक्षुओं से साक्षात्कार कर समझना होगा।

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देसंविवि में उसिनदिएना पर्व हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

आदमी की नस्ल सुधारने का कार्य कर रहा देसंविवि : डॉ. महेश शर्मावैश्विक एकता एवं शांति के लिए गायत्री परिवार पूरे विश्व में सक्रिय : डॉ. पण्ड्याजीरेनासा, संस्कृति संचार का हुआ विमोचन, डॉ. पण्ड्याजी ने अतिथियों को किया सम्मानितहरिद्वार २३.....

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गंगा से भारत की पहचान : डॉ. पण्ड्या

गंगा सफाई में हजारों स्वयंसेवियों ने बहाया पसीनाहरिद्वार में सप्तऋषि क्षेत्र से जटवाडा पुल तक गंगा तटों की हुई वृहत सफाईहरिद्वार २२ अप्रैल।गंगा मैया के अवतरण दिवस के मौके पर गायत्री परिवार के करीब ढाई लाख स्वयंसेवक गोमुख से गंगासागर.....

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जीवन यज्ञमय हो : डॉ. पण्ड्याजी

डॉ पण्ड्याजी ने विद्यार्थियों को बताया मानव जीवन की गरिमा का धर्महरिद्वार २० अप्रैल।देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि मानव जीवन यज्ञमय होना चाहिए। यज्ञ अर्थात् दान, भावनाओं का दान, कर्म का दान आदि। जो कुछ.....