दुनिया का एक अनूठा तीर्थ शांतिकुंज, जहाँ से श्रद्धालु पाते हैं तरुप्रसाद

Published on 2018-02-18

आठ वर्षों में बाँटे १,५०,००० पौधे

जन्मशताब्दी वर्ष में अखिल विश्व गायत्री परिवार ने 'वृक्षगंगा अभियान' आरंभ करते हुए देश में एक करोड़ वृक्ष लगाने का भागीरथी संकल्प लिया था। इसके अंतर्गत देश में हरीतिमा संरक्षण के एक से एक बढ़कर लोकप्रिय भागीरथी प्रयास हुए।

जन्मशताब्दी वर्ष से ही शांतिकुंज में भी हरीतिमा संवर्धन के लिए एक भागीरथी अभियान आरंभ हुआ। तब से लेकर आज तक यहाँ आने वाले शिविरार्थियों, तीर्थयात्रियों को नि:शुल्क पौध दी जाती है। वर्षाऋतु में सामूहिक वृक्षारोपण के लिए सैकड़ों वृक्ष उपलब्ध कराये जाते हैं। उद्यान विभाग प्रभारी श्री सुधीर भारद्वाज के अनुसार पिछले आठ वर्षो में शांतिकुंज द्वारा लगभग १,५०,००० पौधे वितरित किये जा चुके हैं। ये सारे पौधे शांतिकुंज की नर्सरी में ही तैयार किये गये और वितरित किये गये हैं।

संभवत: शांतिकुंज दुनिया में एकमात्र ऐसा आध्यात्मिक तीर्थ है जहाँ इतने लम्बे समय से श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में फलदार, छायादार और औषधीय गुणों वाले बहुमूल्य पौधे नि:शुल्क प्रदान किये जाते हैं।

वसंत पर्व से इस अभियान को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए अभिनव प्रयास हुआ। शांतिकुंज के गेट क्रमांक ३ पर उद्यान विभाग के समक्ष एक अत्यंत आकर्षक कार्यालय बनाया गया, जिसकी ओर हर आगंतुक का ध्यान सहज ही आकर्षित हो जाता है। इस पहल से तरुप्रसाद प्राप्त करने वालों की संख्या कई गुना बढ़ गयी है।

वृक्षगंगा अभियान की अन्य महत्त्वपूर्ण सफलताएँ

वृक्षगंगा अभियान के अंतर्गत देश में हरीतिमा संवर्धन के कई आदर्श और लोकप्रिय प्रयास हुए। श्रीराम स्मृति उपवनों की स्थापना, तरुपुत्र महायज्ञ से मध्य प्रदेश की १५१ पहाड़ियों को हराभरा किया जाना, कोलकाता के युवाओं द्वारा पिछले ३७५ रविवारों से वृक्षारोपण का अनवरत क्रम चलाना जिसके अंतर्गत अब तक लगभग ४०,००० वृक्ष लगाये और संरक्षित किये गये हैं, बनास नदी की तराई में करोड़ों वृक्ष लगाया जाना और इस वर्ष १० करोड़ वृक्ष लगाने का संकल्प लिया जाना कुछ ऐसे ही भागीरथी कार्य हैं।


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