Published on 2018-03-03

जाति भेद के उन्मूलन का महापर्व होली : डॉ. पण्ड्याजी

हरिद्वार ३ मार्च।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय तथा गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में कुरीति मिटाने के संकल्प के साथ होली मनाई गयी। सैकड़ों लोगों के प्रतिनिधि के रूप में गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी व श्रद्धेया शैलदीदीजी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ होली पर्व का पूजन सम्पन्न कराया।

इस अवसर पर श्रद्धेय डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि जाति, वर्ग भेद के उन्मूलन का महापर्व है- होली। होली के अवसर पर दुर्भावों को मिटाने के लिए आगे आने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणत्व (समाज हित में निःस्वार्थ भाव से कार्य करने वाला) के अभिवर्द्धन के लिए पूज्य गुरुदेव ने जो सूत्र दिया है, यह पर्व- आयोजन उस दिशा में एक सार्थक पहल है। डॉ. पण्ड्याजी ने कहा इस वर्ष अश्लीलता उन्मूलन को व्यापक आन्दोलन बनाया जा रहा है। युवा जोश को अश्लीलता की अनगढ़ता से बचाकर शालीनता की, सृजन की दिशा में लगाया जाना जरूरी है। समाज की ऊर्जा को कुयोग से बचाकर सुयोग में लगाने को अभियान का एक महत्त्वपूर्ण चरण मानकर इसे व्यापक रूप दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. पण्ड्याजी ने चार वर्ण के लिए चार प्रमुख त्यौहारों की विस्तृत जानकारी दी।

होली के अवसर पर शांतिकुंज में वरिष्ठ कवि एवं प्रज्ञा अभियान के संपादक श्री वीरेश्वर उपाध्याय के नेतृत्व में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें श्री श्याम बिहारी दुबे, मंगल सिंह आदि कवियों द्वारा प्रस्तुत हास्य कविताओं से लोग खूब आनंदित हुए।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के आम्रकुंज में होली का पर्व मनाया गया। इस अवसर पर गणेश, नारद, शिव आदि रूप में विद्यार्थियों ने वर्तमान समय की चुनौतियों के प्रति सचेत करते हुए युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के प्रेरित किया। इस लघु नाटिका में विवि के विद्यार्थियों के साथ विदेशी मेहमानों ने भी बढ़ चढ़कर भागीदारी की। कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित विवि परिवार ने फूलों की होली खेली।


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