Published on 2018-03-04

खेल शारीरिक मानसिक दृढ़ता का परिचायक : डॉ. पण्ड्याजी
खेल भावना से ही खेलें : शैलदीदीजी
४ सौ से अधिक प्रतिभागियों के बीच हो रहे हैं विभिन्न खेल

हरिद्वार ४ मार्च।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय खेल महोत्सव का आज शुभारंभ हो गया। इस महोत्सव में ४ सौ से अधिक अंतेःवासी कार्यकर्त्ता भागीदारी कर रहे हैं।

खेल महोत्सव का उद्घाटन अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्याजी एवं श्रद्धेया शैलदीदीजी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि खेल जीवन का अनिवार्य अंग है। दिनभर की थकान के बीच कुछ समय खेलते हुए बिताना संजीवनी के समान है। इससे परस्पर सहयोग, आनंद और उल्लास का जो वातावरण बनता है, वह हमारी क्षमता और सक्रियता को बढ़ा देता है। खेल शारीरिक व मानसिक दृढ़ता का नाम है। श्रद्धेया शैलदीदीजी ने कहा कि खेल में हार- जीत तो लगा रहता है, यदि जीत गये, तो अपने साथी खिलाड़ी के मन को भी जीतने का प्रयास करें और हारे तो मन को छोटा न होने दें। उन्होंने खिलाड़ी भाव से भागीदारी करने की प्रेरणा दी। उल्लेखनीय है कि इस खेल महोत्सव का आयोजन स्वयं श्रद्धेया शैल जीजी की प्रेरणा से ही हुआ है। इससे पूर्व खिलाड़ियों द्वारा निकाली गयी मशाल रैली को शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री वीरेश्वर उपाध्याय, डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. बृजमोहन गौड ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

खेल महोत्सव में शांतिकुंज के १८ से लेकर ८० वर्ष तक के कुल ४ सौ से अधिक खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। रस्साकसी, कबड्डी, वॉलीबॉल, दौड़ आदि प्रतियोगिताएँ आयोजित की गयी हैं। हार- जीत की प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर खेलने का अद्भुत उत्साह लोगों में दिखाई दे रहा है। खेल महोत्सव में व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र, प्रज्ञा अभियान के संपादक श्री वीरेश्वर उपाध्याय, डॉ. बृजमोहन गौड़, डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी सहित सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ कार्यकर्त्ता भाग ले रहे हैं। ६ मार्च तक चलने वाले इस महोत्सव के उद्घाटन सत्र में रस्साकसी व बॉलीबाल की प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं।


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