Published on 2018-03-07

खिलाड़ी खेलें, जीती खेल भावनाप्रौढों को याद आ गया बचपन, कई प्रतियोगिताएँ जीतींकबड्डी, वॉलीबाल, खो- खो, लाठी संचालन सहित सात प्रतियोगिताएँ
हरिद्वार ७ मार्च।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय खेल महोत्सव का आज समापन हो गया। इसमें ४ सौ से अधिक खिलाड़ियों ने कबड्डी, वॉलीबाल, खो- खो, दौड़, लाठी संचालन, रस्साकशी सहित ७ प्रतियोगिताओं में भाग लिया। कबड्डी, वॉलीबाल, खो- खो में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। कई मौके पर हार- जीत को नजरअंदाज करते हुए जीती हुई टीम ने अपने विपक्षी टीम को ही विजेता घोषित कर दिया। खिलाड़ियों ने हार- जीत से ज्यादा अपने भाइयों को प्रोत्साहित करने का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि खेलों में श्रम और हास्य का अद्भूत समन्वय है। खेलते समय बहने वाला पसीना के साथ बीमारियाँ, हताशा और निराशा के भाव बह जाते हैं। व्यक्ति को यदि हर दिन तरोताजा रहना हो तो उसे किसी न किसी खेल में अवश्य भागीदारी करनी चाहिए। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदीजी ने कहा कि हार- जीत के लिए नहीं, प्रेम और उल्लास बढ़ाने के लिए खेले है। यह एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है। इसे सदैव अपनाये रखें। प्रमुखद्वय ने विजयी खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया।

वॉलीबाल में अरुण खंडागले की टीम विजेता तथा रजनीश गौड़ की टीम उपविजेता रही। कबड्डी मे लक्ष्मीनाथ की टीम ने जग्गूलाल की टीम को ३६- ३२ अंकों से हराया। खो- खो में दयाराम नेताम की टीम ने खेल भावना का जबरदस्त प्रदर्शन किया और उन्होंने छन्नूलाल की टीम को कड़े मुकाबले में हराया। रस्साकशी में पद्माकर लांजेवार की टीम ईश्वरी यादव की टीम से ३- ० के अंतर से जीती। अलग- अलग आयु वर्ग के सौ मीटर दौड़ में मनोज, जग्गुलाल, अजय त्रिपाठी, अमर नाग अव्वल रहे, तो वहीं सुरेश साहू, शनुराम, पुन्नुराम, प्रेमचन्द द्वितीय रहे। यहाँ हार- जीत की प्रतिद्वंद्वता से परे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक एक- दूसरे को उत्साहित करते हुए स्वयं उत्साह से लबरेज नजर आये। एक पारिवारिक वातावरण में आनंद और उल्लास का वातावरण बनाने का जो प्रयास आयोजकों द्वारा किया गया, उसमें पूरी तरह से सफल रहे। लाठी संचालन में २० से ६० वर्ष के युवा खिलाड़ियों ने विभिन्न पैतरों का प्रदर्शन किया। योग प्रदर्शन में योग प्रशिक्षु एवं प्रशिक्षकों के समूह ने सूर्य नमस्कार, प्रज्ञा योग के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को नियमित रूप से योग को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। खेल रेफरी की भूमिका देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के खेल अधिकारी नरेन्द्र सिंह, स्काउट मास्टर सीताराम सिन्हा, विष्णु मित्तल, सुखदेव अनघोरे आदि ने निभाया। शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने समय- समय पर खिलाड़ियों को विशेष मार्गदर्शन दिया। श्री विनय वाजपेयी, श्याम बिहारी दुबे, सुधीर भारद्वाज, केपी दुबे, महेश राठौर, मंगल सिंह, कीर्तन देसाई, नरेन्द्र ठाकुर, राजेन्द्र पोयाम, रामदास रघुवंशी आदि का सक्रिय योगदान रहा।


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