दक्षिण अफ्रीका में सेवा- समयदान की अविस्मरणीय अनुभूतियाँ

Published on 2018-03-09

अफ्रीका के प्रवास से लौटे श्री भावसार दम्पती वहाँ सेवाएँ प्रदान कर भावविभोर थे। दुनिया के जिस एकमात्र क्षेत्र पूर्वी अफ्रीका में परम पूज्य गुरुदेव गये, युगचेतना का बीजारोपण किया, उसे पुष्पित- पल्लवित करने के लिए किये गये तप की अनुभूतियाँ अविस्मरणीय, आह्लादकारी थीं। इससे पूर्व भी भावसार दम्पती ने सन् २०१५ में न्यूजर्सी में भी एक वर्ष का समयदान कर चुके हैं।

गाँधीनगर, गुजरात के समर्पित कार्यकर्त्ता श्री राजेश भावसार एवं श्रीमती गीताबेन भावसार दक्षिण अफ्रीका में एक वर्ष का समयदान कर हाल ही में शांतिकुंज लौटे। गायत्री आश्रम लेनेशिया को केन्द्र बनाकर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाबवे के कई नगरों में प्रभावशाली ढंग से मिशन का संदेश पहुँचाया। विद्वान परिव्राजक दम्पती ने जगह- जगह तीन दिवसीय व्यक्तित्व परिष्कार शिविर, एक दिवसीय स्वास्थ्य जागृति शिविर, ऊर्जा संवर्धन एवं वातावरण परिष्कार प्रधान संगोष्ठियाँ आयोजित कीं।

अपने संदेश के साथ मिशन के आॅडियो- वीडियो के माध्यम से युग चेतना का व्यापक विस्तार किया। गायत्री चेतना केन्द्र लेनेशिया पर दैनिक यज्ञ, योग, जप, अनुष्ठान के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यकर्त्ताओं में श्रद्धा संवर्धन का क्रम बनाये रखा, परिणाम स्वरूप घर- घर यज्ञ, दीपयज्ञ, जन्मदिन, विवाह दिन, गृहप्रवेश जैसे आयोजन आए दिन होते ही रहे।

श्री भावसार दम्पती ने अपने प्रवास की विशेष उपलब्धियों के रूप में महात्मा गाँधी जी की स्मृति में बने टॉलस्टॉय फार्म में वृक्षारोपण किया। आश्रम के पास के अनाथालय में बच्चों को योग एवं गायत्री साधना का सतत अभ्यास कराया।

जिम्बाबवे की राजधानी हरारे की दो पाठशालाओं में बच्चों को गायत्री मंत्र की वैज्ञानिकता और आज के समय में उसकी उपासना की प्रासंगिकता समझायी। वहाँ तीन दिवसीय गोष्ठी का आयोजन कर जहाँ ८० के दशक से जुड़े परिजनों को आत्म गौरव की अनुभूति करायी, वहीं नयी पीढ़ी की युग निर्माण आन्दोलन के प्रति आस्था बढ़ायी।

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