Published on 2018-03-10

कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को तनाव से दूर रहने के गुर सिखाये

हरिद्वार ९ मार्च।
परीक्षा के समय तनाव से जितना दूर रहा जाय, उतना ही अच्छा है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ। प्रणव पण्ड्याजी ने विवि में ध्यान की विशेष कक्षा ली। जिसमें विद्यार्थियों को 'हृदय पर केन्द्रित होने का ध्यान' में गोता लगाया, तो वहीं ध्यान के विविध लाभों की जानकारी दी।

इस अवसर पर आयोजित ध्यान की विशेष कक्षा में कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि अंतर्मन को श्रेष्ठ विचारों से स्नान कराना सर्वश्रेष्ठ ध्यान है। ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायक है। परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से ध्यान करना चाहिए, जिससे वे तनाव से बचे रहें और अपनी परीक्षा में इच्छित फल प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि ध्यान से दमन नहीं, परिवर्तन होता है। भावनाओं को मष्तिस्क से न जोड़कर हृदय से जोड़ना चाहिए।

सेवा भाव जगाने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि फल पाने के लिए पहले बीज बोना पड़ता है और आज इसकी कमी दिखाई दे रही है, क्योंकि लोग फल की चाह रखते हैं परंतु पुरुषार्थ नहीं करते जिसकी वजह से समाज मे असंतुलन की स्थिति दिखाई पड़ रही है और ईर्ष्या और द्वेष की भावनाएं बढ़ रहीं हैं। इस वातावरण को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने विचारों को परिष्कृत करना होगा और नए जीवन की संरचना करनी होगी। उन्होंने सच्ची सेवा के तीन सूत्र श्रद्धा संवर्धन, पीड़ा निवारण, पतन निवारण भी बताए।

इससे पूर्व संगीत विभाग के भाइयों ने ध्यान पर विशेष गीत प्रस्तुत किया और कुलाधिपति डॉ पण्ड्याजी ने विद्यार्थियों की विविध शंकाओं का समाधान किया। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित समस्त विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।


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