Published on 2018-03-26

विवेक प्राप्त करने का सरल उपाय है गायत्री साधना : डॉ पण्ड्याजी
देश- विदेश के साधकों ने सामूहिक साधना में की भागीदारी

हरिद्वार २५ मार्च।

नवरात्र साधना के अंतिम दिन गायत्री तीर्थ शांतिकुंज व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में साधकों ने अपने- अपने अनुष्ठान की पूर्णाहुति की। इस अवसर पर शांतिकुंज परिसर में बहिनों ने २७ कुण्डीय तथा देसंविवि परिसर में छात्रों ने ९ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ सम्पन्न कराया, जिसमें साधकों ने विभिन्न पारियों में हवन कर प्राप्त ऊर्जा को जनहित में लगाने का संकल्प लिया।

इससे पूर्व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने साधकों की विशेष कक्षा में साधना के विविध पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सद्बुद्धि प्रदात्री माँ गायत्री की साधना से साधक में विवेक का जागरण होता है। विवेक मनुष्य को भ्रान्तियों से बचाता है और सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करता है। विवेक का धनी हर प्रकार की पीड़ाओं से मुक्त और सदैव प्रसन्नचित्त रहता है। उन्होंने कहा कि विवेकपूर्ण व्यक्ति में न्याय करने की क्षमता आती है और तमाम परिस्थितियों को समान रूप से देखने की बुद्धि विकसित होती है।

उन्होंने कहा कि विवेकपूर्ण व्यक्ति संसार रूपी रंगमंच में श्रेष्ठ अभिनय करते हैं जिससे वे तारों में चंद्रमा की भांति अलग चमकता है। ऐसे व्यक्ति ही समाज के दुःखों का निवारण कर पाता है। उन्होंने कहा कि विवेकवान व्यक्ति सच्चे प्रणयता एवं इतिहास सृजेता बनकर तमस का आवरण समाप्त कर देते हैं।

कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि जो अपने पराक्रम, धन, वैभव, संपदा पर मद हो गया, उसका विवेक खो जाता है। जब उसके अंदर मद प्रवेश करता है तो उसके द्वारा अर्जित ऊर्जा क्षीण होने लगती है और साधक उन्माद, अहंकार से भर जाता है। उन्होंने युवाओं को साधना से अर्जित ऊर्जा को विकास में लगाने का आवाहन किया।

इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने 'जिनके हो पद चिह्न अमिट, वह ही इतिहास सृजेता...' गीत गाकर उपस्थित साधकों को रचनात्मकता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही नवरात्र साधना का समापन हो गया।

उधर शांतिकुंज के रामकृष्णहॉल में आयोजित साधकों को विदाई संदेश को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री केसरी कपिल ने साधना से प्राप्त ऊर्जा को समाज के हित में लगाने के आवाहन किया। इस अवसर नवरात्र अनुष्ठान में आये साधकों ने शांतिकुंज द्वारा संचालित हो रहे विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम को गति देने का संकल्प लिया। इस दौरान देश- विदेश से सैकड़ों नर- नारी उपस्थित रहे।


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