Published on 2018-03-11
img

गायत्री मन्दिर सिरसिल्ला प्राण प्रतिष्ठा समारोह
"गायत्री परिवार ध्यान मन्दिर" सिरसिल्ला, राजन्ना-सिरसिल्ला जिला (तेलंगाना राज्य) में 10 मार्च को सायं 4:00 बजे वेंकटेश्वर मन्दिर से 101 कलशों की मङ्गल कलश यात्रा का शुभारम्भ शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि श्रीमती प्रशान्ति शर्मा ने किया। 300 बहिनों नें भाग लिया। प्रज्ञा संगीत और जयघोषों से पूरा नगर गुंजायमान हुआ। 4 कि.मी. की यात्रा नगर वासियों को निमन्त्रण देते हुए सम्पन्न हुई। अम्बिका नगर स्थित गायत्री मन्दिर के 24 कुण्डीय यज्ञशाला में सायं 6:00 बजे भव्य स्वागत के साथ कलश स्थापित किये गये। तत्पश्चात विराट दीपमहायज्ञ सम्पन्न किया गया। स्थानीय परिजन दीप यज्ञ की छ्टा देख भाव विभोर हो गये। पूर्णाहुतिः के समय कई लोगों ने नये संकल्प लिये। अपनी पुरानी बुराइयों में से एक-एक करके दीप देव के समक्ष समर्पित कीं।  

गायत्री माता की प्रतिमा को पिछले 40 दिन से जल, धन्यम (अनाज), पुष्प, फल, सिक्के रुपये-पैसे के पाँच चीजों के मध्य मूर्ति को कुछ-कुछ दिनों तक रखते रहे। रविवार 11 मार्च को प्रातः 3:00 बजे से मन्दिर के गर्भ गृह में प्रतिष्ठित किया उसके बाद दस स्नान कर मूर्ति के पवित्र, दिव्य संस्कार जागृत किये गए। प्राण प्रतिष्ठा प्रातः 5:30 बजे सूर्योदय के पूर्व सम्पन्न किया गया। गायत्री माता विग्रह के विभिन्न अंगों-प्रत्यंगों में स्पर्श कर प्राण स्थारी कारण किया गया। शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि श्री उमेश शर्मा एवं श्रीमती प्रशान्ति शर्मा ने प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न की। मन्दिर के सपत्नीक सात ट्रस्टियों के साथ 108 जोड़े और 16 कन्याओं ने भी प्रातः 5:00 बजे से मन्दिर प्रांगण में सामूहिक मन्त्र जाप और गायत्री चालीसा पाठ कर अपनी भागीदारी सम्पन्न की।  प्रतिष्ठा के बाद महाआरती के समय पर्दा हटते ही माँ भगवती गायत्री के दिव्य-भव्य दर्शन सभी ने किये, जय घोषों से वातावरण गुंजायमान हुआ। और महाआरती पहले शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधियों ने की फिर ट्रस्टीगणों नें की बाद में सभी श्रद्धावान भक्तों नें माताजी की प्रथम आरती का आनन्द लाभ लिया। आरती के तत्पश्चात श्री उमेश शर्मा जी ने प्राण प्रतिष्ठा का महत्व, मन्दिर जन जागरण के केन्द्र बनें, हमारी भूमिका आदि विषयों पर विशेष उद्बोधन दिया। 

24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में सभी ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। सिरसिल्ला म्युनिस्पल चेयर पर्सन श्रीमती श्यामला पावनी दास जी ने गायत्री मन्त्र के बारे में और गायत्री परिवार के बारे में प्रकाश डाला। शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि श्रीमती प्रशान्ति शर्मा जी ने गायत्री मन्त्र चादर उढ़ाकर सम्मानित किया। गुरुदेव के साहित्य को भेंट किया। उसके बाद यज्ञशाला में सभी ने आहुतिः प्रदान की और शान्तिकुञ्ज गुरुद्वारा के बारे में बताया, युगसाहित्य और पत्रिका के सदस्यता के बारे में सभी को विस्तार से बताया गया। साहित्य स्टॉल पर लोगों की भारी भीड़ लगी रही। सभी ने ज्ञान यज्ञ में आहुतिः देने का मन बनाया। अधिकाधिक साहित्य खरीदा गया। और नियमित स्वाध्याय का संकल्प लिया। तीन वर्षों से इस मन्दिर की निर्माण तैयारी चल रही थी। इसका संचालन श्री बादम प्रकाश जी ने किया। साथ में श्री राजन जी ने पूरी जिम्मेदारी से कार्य को पूर्णतः प्रदान की।  कार्यक्रम की सफलता यही रही कि पिछले पाँच वर्षों से शान्तिकुञ्ज हरिद्वार प्रतिनिधि नहीं आये जिससे सभी उदास और दुखी थे। शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधियों के आने से नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। नये संकल्प जागे, आनन्द में झूम पड़े। आस-पास के पाँच जनपदों के कार्यकर्त्ता भागे-दौड़े चले आये। सभी के मानों में, दिलों में नव जीवन संचार हुआ।

कार्यकर्त्ता गोष्ठी 
यज्ञ और भोजन के बाद 1:00 बजे से कार्यकर्त्ता गोष्ठी सम्पन्न हुई। करीमनगर जिला के श्री एस. सुगनकर राव जी, राजन्ना-सिरसिल्ला जिला के डॉ. पुल्ली सत्यनारायण जी, जगत्याल जिला के श्री आडेपु गंगाराम जी, मंचिरियाल जिला के श्री राज बाबू जी, वारंगल जिला के श्री सदानन्दम जी आदि प्रतिनिधियों के साथ जनपदों के सक्रिय, प्रमुख कार्यकर्ताओं की विशेष भागीदारी हुई। तेलंगाना राज्य में मिशन को आगे ले जाने हेतु पाँचों जिले में 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ करने के संकल्प पत्र और कार्यक्रम मांग पत्र भरकर दिये। शान्तिकुञ्ज से कार्यक्रम के लिए आशीर्वाद की भावभरी प्रार्थना की। 108 कुण्डीय के प्रयाज कार्यक्रम में 1100 नये घरों में देवस्थापना और पत्रिका सदस्यता करने का संकल्प लिया।

कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण शिविर 
आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य के पुराने कार्यकर्त्ताओं के लिये रिफ्रेश और नयों को सही मार्गदर्शन के लिए नए हाथ तैयार हों इस प्रयोजन से दक्षिण भारत ज़ोन की ओर से इस वर्ष तेलुगु प्रदेशों में कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण श्रृंखला शुभारम्भ की जा रही है। यहाँ आये पाँच जनपदों के प्रमुखों ने प्रशिक्षण के माँग पत्र भर कर दिये। साथ ही अपने नये हाँथों को बढ़ाने के लिए "कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण शिविर" पाँच दिवसीय सभी शाखाओं में रखने का संकल्प किया। आगामी दिनों में यह प्रशिक्षण इस क्षेत्र के लिये मील का पत्थर साबित होगा। प्रशिक्षण की आवश्यकता कई वर्षों से थी। अब यह आंदोलन की तरह चलेगी। प्रशिक्षण के प्रमुख विषय संगीत, ढपली, कर्मकाण्ड, संस्कार, दीपयज्ञ, प्रज्ञायोग और संभाषण प्रमुख रहेंगे


Write Your Comments Here:


img

गौशाला में 75 पेड़ लगाये गए

बाड़मेर। राजस्थान नंदी गौशाला में गौ- वंशों की छाया के लिए गायत्री परिवार की ओर से 75 छायादार पौधों.....