Published on 2018-04-02

दृष्टिकोण के परिवर्तन से विकास संभव : शैफाली पण्ड्याजी
उप्र के बीस जिलों की ३५० से अधिक बहिनें शामिल

हरिद्वार २ अप्रैल।

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में पाँच दिवसीय नारी चेतना जागरण शिविर का आज शुभारंभ हुआ। शिविर का उद्घाटन महिला मण्डल प्रमुख श्रीमती यशोदा शर्मा, श्रीमती शैफाली पण्ड्याजी , डॉ. सुलोचना शर्मा, श्रीमती भारती नागर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। शिविर में उप्र के आगरा, अलीगढ़, मैनपुर, झाँसी सहित बीस जिलों की ३५० से अधिक बहिनें शामिल हैं।

शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए गायत्री विद्यापीठ के व्यवस्था मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्याजी
ने कहा कि समय के साथ चलने के लिए दृष्टिकोण में परिवर्तन आवश्यक है। आज सभी क्षेत्रों में साहसी, व्यक्तित्ववान, संकल्पशक्ति से लबरेज लोगों की जरूरत है, जो आगे बढ़कर समाज को सही दिशा दे सकें। गायत्री परिवार के संस्थापकद्वय की भविष्यवाणी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाला समय मातृशक्ति प्रधान होगा। इसके लिए बहिनों को शिक्षित, साहसी व सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए कदम बढ़ाना होगा। बहिनों के सहयोग से ही समाज की कुरीतियाँ- कन्या भ्रुण हत्या, बाल विवाह, बालश्रम आदि में कमी आ सकती है। महाराष्ट्र की सिंधु ताई के संघर्षमय जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए छोटे- छोटे कदम के साथ आगे बढ़ना चाहिए, तभी समाज सुंदर व विकसित हो सकता है। उन्होंने कहा कि नारी संवेदना की मूर्ति होती है। भेदभाव से ऊपर उठकर अपनी संवेदना को परिवार, समाज व राष्ट्र के विकास में लगाने के लिए आगे बढ़ने चाहिए। गायत्री परिवार का नारी चेतना जागरण आयोजन इस दिशा में एक सार्थक पहल है। श्रीमती शशिकला साहू ने कहा कि परिवार को सुसंस्कारी बनाने के लिए स्वयं से शुरुआत करनी होगी।

शिविर समन्वयक डॉ. सुलोचना शर्मा ने बताया कि गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी व श्रद्धेया शैलदीदीजी के मार्गदर्शन में नारी चेतना जागरण शिविरों के शृंखलाबद्ध आयोजन का प्रथम शिविर का आज शुभांरभ हुआ। इससे पूर्व महिला मण्डल की बहिनों द्वारा प्रस्तुत 'उठो नारियों, जागो नारियों ..... ' गीत ने बहिनों में उत्साह का संचार किया। इस अवसर पर प्रमिला साहू, कौशल्या, प्रियंका लांजेवार, मंजू, सेवती, नीलम, नीरु आदि बहिनें उपस्थित रही।


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