Published on 2018-04-03

हमारी सनातन संस्कृति अपनी क्षमताओं का बोध और  उसका सही उपयोग करना सिखाती है। डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, प्रतिकुलपति देसंविवि
हरिद्वार जिले का शिक्षक सम्मान एवं पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न

हरिद्वार। उत्तराखंड

हरिद्वार जिले का भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा- २०१७ का प्राचार्य शिक्षक सम्मान एवं पुरस्कार वितरण समारोह कॉलेज आॅफ इंजीनियरिंग, रुड़की (कॉअर) में २७ फरवरी को सम्पन्न हुआ। समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, प्रतिकुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय थे। उन्होंने सही लक्ष्य तक पहुँचने के लिए यात्रा आरंभ करने से पूर्व लक्ष्य का बोध होना आवश्यक है। हमारी सनातन संस्कृति हमें अपनी क्षमताओं का बोध कराती है, उनका सही उपयोग करने और सही लक्ष्य तक पहुँचने का परम संतोष अनुभव कराती है। जबकि पाश्चात्य संस्कृति धनवान बनना सिखाती है, लेकिन धन का सदुपयोग करना नहीं सिखाती। यही कारण है कि आज की पीढ़ी अकूत धन- साधन होते हुए भी हताशा, निराशा, अशक्ति, अभावयुक्त जीवन जी रही है। वस्तुत: भारतीय संस्कृति का व्यापक विस्तार ही आज की वैश्विक समस्याओं का समाधान है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉअर के अध्यक्ष श्री जे.सी. जैन ने की। इस अवसर पर कॉअर के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल श्री ओ.पी. सोनी, डीन डॉ. वी.के. सिंह, भासंज्ञाप प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री प्रदीप दीक्षित मंचासीन थे। समारोह में सभी वर्गों के वरीयता प्राप्त विद्यार्थियों के अलावा सर्वाधिक विद्यार्थी परीक्षा में शामिल कराने वाले १० विद्यालयों के प्राचार्यों एवं विशिष्ट योगदान देने वाले कुल ४० प्राचार्यों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री जे.सी. जैन ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है जो अपने ही नहीं, सारी दुनिया का कल्याण चाहती है। संस्कारवान व्यक्ति ही वास्तव में सुखी जीवन जी सकता है।

कार्यक्रम का संचालन भासंज्ञाप के जिला संयोजक श्री आर.डी. गौतम ने किया। सी.पी. सिंह ढाका, पारूल अग्रवाल, प्रीति भाटिया, धीरेन्द्र प्रताप शास्त्री, रामगोपाल अग्रवाल, एस.सी. सिंघल, एस.बी. शुक्ला, सीताराम, अर्जुन सिंह, सुखलाल का कार्यक्रम आयोजन के साथ परीक्षा संचालन में भी भरपूर सहयोग रहा। डीन डॉ. वी.के. सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ।


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