युगाण्डा में हुआ १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ

Published on 2018-04-04

डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी के नेतृत्व में पहुंची शांतिकुंज टीम
भारतीय परंपरा के अनुसार हुए विभिन्न संस्कार

हरिद्वार ३ अप्रैल।
पूर्वी अफ्रीका के देश युगाण्डा की राजधानी कम्पाला में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन हुआ। इसमें युगाण्डावासियों ने बढ़- चढ़कर भागीदारी कर समाज के विकास में चलाये जा रहे रचनात्मक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का संकल्प जताया है।

शांतिकुंज मीडिया विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पूर्वी अफ्रीका के युगाण्डा में शांतिकुंज के तत्त्वावधान में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन हुआ। यहाँ के मूल निवासियों ने यज्ञायोजन में भागीदारी करते हुए भारतीय संस्कृति को अपनाने के लिए अपना कदम बढ़ाया है। प्रवासी भारतीयों के अलावा बड़ी संख्या में युगाण्डा के मूल निवासियों ने भी श्रद्धाभावना के साथ यज्ञ करने पहुँचे। अधिकतर युवा भारतीय वेशभूषा में नजर आये।

इस अवसर पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति व टीम प्रमुख डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने मानव जीवन की गरिमा पर विशेष व्याख्यान दिया। डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने कहा कि मानव जीवन कई जन्मों के सौभाग्य से मिलता है। इस जीवन का अपना लक्ष्य निर्धारित करें और संकल्प के साथ उस दिशा में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि गायत्री महामंत्र का नियमित साधना से संकल्प शक्ति सुदृढ़ होती है, जो लक्ष्य तक पहुंचने में सीढ़ी जैसा काम करता है। इस यज्ञायोजन में भारतीय परंपरा के अनुसार बड़ी संख्या में विभिन्न संस्कार सम्पन्न कराये गये, जिसमें अनेक युवा दम्पति और स्थानीय लोग भी शामिल रहे। शांतिकुंज से डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी के अलावा शांतिभाई पटेल, ओंकार पाटीदार, वसंत यादव व रामावतार पाटीदार की टोली पूर्वी अफ्रीका के दौरे पर पहुंची है।


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