Published on 2018-04-05

नवरात्र की नौ देवियों की प्रतिनिधि बनीं युवतियाँ
पूरे आई.टी. क्षेत्र को गायत्रीमय और राममय कर दिया

बैंगलोर। कर्नाटक

गायत्री चेतना केन्द्र बैंगलोर के संचालक नवयुवकों ने नवरात्र साधना की पूर्णाहुति-रामनवमी के दिन एक विशिष्ट प्रयोग करते हुए पूरे आई.टी. क्षेत्र को गायत्रीमय एवं राममय करने का सफल प्रयास किया। इसके अंतर्गत गायत्री चेतना केन्द्र पर ९ कुण्डीय यज्ञ हुआ। यज्ञ में लगभग ५०० युवक-युवतियों और नैष्ठिक परिजनों ने भाग लिया।

विशेष प्रयोग के रूप में यज्ञ का संचालन नवदुर्गा की प्रतीक नौ बहनों ने किया। गायत्री रानी, रीता रजक, प्रीती सेन, अर्पिता कटरे, युक्ता, गायत्री गोयल, सायुज्जता बड़गोती, नीलम राजपूत एवं मनीषा सिंह ने क्रमश: प्रथम से नवम दिन के नवदुर्गा के नौ रूपों की व्याख्या की। उनके ध्यान एवं पूजन की विधियाँ बतायीं एवं उनके माध्यम से जीवन में श्रेष्ठता का संचार करने की प्रेरणाएँ दी। अर्पिता कटरे ने रामनवमी का महत्त्व भी समझाया।

मातृशक्ति श्रद्धांजलि महापुरश्चरण साधना संकल्प

वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री राजेश सिंह के अनुसार सभी श्रद्धालुु याजकों से 'मातृशक्ति श्रद्धांजलि महापुरश्चण' के अंतर्गत प्रतिदिन दो घंटे साधना करने, ३० मिनट स्वाध्याय करने, व्यसन-फैशन-अश्लीलता-कुरीतियों से दूर रहने का संयम  करने और राष्ट्रोत्थान के लिए नियमित रूप से समयदान-अंशदान करने के संकल्प कराये गये।

प्रीति सेन ने देवदक्षिणा-पूर्णाहुति स्वरूप ५००० पेड़ लगाने, २४ बाल संस्कार शालाएँ चलाने, गरीबों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने, स्वच्छता अभियान चलाने, स्कूल-कॉलेज-कम्पनियों में डिवाइन वर्कशॉप चलाने के सामूहिक संकल्प कराये गये।


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