Published on 2018-04-05

धर्मतंत्र जागे, जनमानस निरर्थक परम्पराओं को त्यागे

देहरादून। उत्तराखंड

पुण्यदायी कार्य वही है जो लोकहितकारी है। जो कल पुण्यदायी था, बदलती परिस्थितियों में वही हानिकारक भी हो सकता है। कभी गंगा में पुराने वस्त्र प्रवाहित करना पुण्यदायी रहा होगा, लेकिन इससे आज गंगा बुरी तरह प्रदूषित हो रही है। लोगों में यह विवेक जगाने के लिए धर्मतंत्र को जाग्रत होना पड़ेगा। भारतीय समाज पर धर्मतंत्र की गहरी पैठ है, अत: परम्पराओं को बदलने के लिए धर्मतंत्र के ही सर्वाधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।

आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने १७ मार्च को देहरादून में आयोजित एक कार्यशाला में गंगा स्वच्छता के लिए जनजागरूकता संबंधी मार्गदर्शन देते हुए यह विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि केवल तटों पर ही नहीं, जहाँ-जहाँ तक गंगा का पानी जाता है, उस पूरे क्षेत्र में जनमानस को जागरूक करने एवं गंगा स्वच्छता के कार्य में उन्हें सहभागी बनाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर उन्होंने जनजागरूकता संबंधी अनेक सुझाव प्रस्तुत किए। 

द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स (इण्डिया) नामक संस्थान ने यह कार्यशाला 'गंगा के कायाकल्प में जनजागरूकता की भागीदारी' विषय पर संस्था के आॅडिटोरियम में आयोजित की गई थी। संस्थान से जुड़े इंजीनियरों के अलावा नगर के अनेक शासकीय विभागों के प्रतिनिधियों को इसमें आमंत्रित किया गया था।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह के निदेशक डॉ. राघव लैंगर थे। उन्होंने गंगा स्वच्छता के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और कहा कि बिना जनसहभागिता के इस मिशन को सफलता तक पहुँचाना कठिन है। इस कार्य में स्वयंसेवी संस्थाएँ बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि श्री वीरेश्वर उपाध्याय और शांतिकुुंज के यशस्वी निर्मल गंगा जन अभियान के प्रभारी श्री के.पी. दुबे को कार्यशाला में अपने विचार और कार्यानुभवों का लाभ दिलाने के लिए विशेषज्ञ वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।

कार्यशाला का शुभारंभ अतिथियों द्वारा गंगा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स (इण्डिया) के अध्यक्ष इं. आर.वी.एस. चौहान ने स्वागत उद्बोधन दिया। संस्थान के सचिव इं. वी.के. सक्सेना द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का समापन हुआ।

आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने सुझाये कुछ बिन्दु :-

  • गंगातट के आश्रम, मंदिरों के पुजारी, पुरोहित जागरूक हों, जनमान्यताओं को बदलें। गंगा में पुष्प, कपड़े, मूर्तियाँ आदि के विसर्जन को हतोत्साहित किया जाय। इनके स्थान पर श्रद्धालुओं को वृक्षारोपण करने और गंदगी न करने के संकल्प कराये जायें। यज्ञ, कथा जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में भी ऐसे संकल्प कराये जायें।
  • धार्मिक स्थलों पर पुष्प, कपड़े आदि के निस्तारण की प्रेरणादायी व्यवस्था हो, आवश्यक सूचना पटल लगाये जायें। 
  • गंगा एवं अन्य नदियों के आसपास नगर, गाँवों में जनजागरूकता अभियान निरंतर चलते रहें।
  • स्कूल-कॉलेजों में सभा, संगोष्ठियों के माध्यम से नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाई जाये। 
  • जो उद्योग, कल-कारखाने नदियों को प्रदूषित कर रहे हैं, उनके विरुद्ध धरने-प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें सावधान किया जाये और प्रशासन का ध्यान उस ओर आकर्षित किया जाये। 
निर्मल गंगा जन अभियान
श्री के.पी. दुबे ने निर्मल गंगा जन अभियान को पावर पॉइण्ट के साथ बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गंगा कथा, साइकिल रैलियाँ, घर-घर जनसंपर्क, वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों से न केवल गंगा नदी और तटीय गाँवों की, अपितु पूरे देश की नदियों और अन्य जलस्रोतों की सफाई की जा रही है। उन्होंने गंगा की पूरी लम्बाई २५२५ किलोमीटर पर चल रही कार्ययोजना की जानकारी उपस्थित अधिकारियों को दी। गंगा स्वच्छता के अभियान को अपना नैतिक दायित्व बताते हुए परस्पर सहयोग के साथ कार्य को पूर्णता तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।


Write Your Comments Here:


img

गुण, कर्म, स्वभाव का परिष्कार करने वाली विद्या को प्रोत्साहन मिले। श्रद्धेय डॉ. प्रणव जी

देव संस्कृति विश्वविद्यालय का 35वाँ ज्ञानदीक्षा समारोह 21 जुलाई 2019 को कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी की अध्यक्षता में.....

img

शिक्षण संस्थानों में परिचय के नाम पर उत्पीड़न नहीं, विद्यारंभ संस्कार होना चाहिए

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के 35वें ज्ञानदीक्षा समारोह में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री का संदेश   यह ज्ञानदीक्षा समारोह जीवन के.....

img

तीर्थनगरी हरिद्वार में पाँच कार्यक्रम हुए शान्तिकुञ्ज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने दिये प्रभावशाली संदेश

हरिद्वार। उत्तराखंड तीर्थ नगरी हरिद्वार में श्री आर.डी. गौतम एवं उनके सहयोगियों के प्रयासों से पाँच स्थानों पर गुरुपूर्णिमा.....