संस्कृति के प्रचार के लिए लिथुआनिया ने देसंविवि से मिलाया हाथ

Published on 2018-04-12
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 देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज का भारतीय संस्कृति को देश-विदेश में फैलाने के अभियान में एक कदम और आगे बढ़ा है। विगत दिनों लिथुआनिया सरकार की ओर से की गयी पहल पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ने अपनी सहमति दे दी। इस आशय की जानकारी देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्याजी ने आज यहाँ दी।

प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी  ने बताया कि कुछ समय पूर्व बाल्टिक राष्ट्रों में लिथुआनिया सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा एक महत्त्वपूर्ण संस्तुति पत्र जारी किया था जिसके अनुसार भारत के देसंविवि के बाल्टिक संस्कृति एवं अध्ययन केंद्र को अधिकृत रूप से मान्यता प्रदान की गयी थी। इसके अंतर्गत लिथुआनिया सरकार द्वारा देसंविवि के चालीस विद्यार्थियों को लिथुआनिया में स्थित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में परस्पर सांस्कृतिक समानता संबंधी अध्ययन हेतु छात्रवृत्ति की मंजूरी प्रदान की गयी। इसके विधिवत कार्यान्वयन हेतु विल्नियस विश्वविद्यालय, लिथुआनिया व देसंविवि के मध्य संयुक्त अनुबंध संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि यह अनुबंध अंतर्राष्ट्रीय सहयोग व बाल्टिक अध्ययन के अंतर्राष्ट्रीयकरण हेतु लिथुअनिअन शैक्षणिक योजना की परियोजना के साथ ही दोनों देशों के कानून व अन्य नियमों के विस्तार को भी पूर्ण करने में अपना योगदान देगा।               

अवगत हो कि बाल्टिक संस्कृति व अध्ययन केंद्र, भारत और बाल्टिक देशों की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। भारत में स्थापित एशिया के इस प्रथम केंद्र देसंविवि में संस्कृति के विभिन्न तत्व संबंधी शोध कार्य, प्रोजेक्ट कार्य, कार्यशाला आदि के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियों व कार्यक्रमों के संबंध में नए-नए शोध हो रहे हैं।        

यहाँ बताते चलें कि कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी भारतीय संस्कृति के प्रचार के लिए अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। वे पिछले कई दशकों से देश-विदेश के युवाओं में भारतीय संस्कृति के बीज बोने के लिए अथक परिश्रम भी कर रहे हैं।


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