विचार क्रांति का महान प्रयोजन पूरा करते श्रद्धा संवर्धन गायत्री महायज्ञ

Published on 2018-04-12

अश्वमेध महायज्ञ की २३वीं वर्षगाँठ पर दो लाख लोगों तक पहुँचाया युग संदेश

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश
गायत्री परिवार गोरखपुर ने २४ से २७ फरवरी तक ५१ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, प्रज्ञापुराण कथा एवं विराट पुस्तक मेला आयोजित कर अश्वमेध महायज्ञ गोरखपुर की २३वीं वर्षगाँठ मनाई। इस कार्यक्रम के माध्यम से ब्लॉक, वॉर्ड, ग्रामों के ५०,००० घरों से सम्पर्क किया गया, दो लाख से अधिक लोगों को युग चेतना के क्रांतिकारी प्रवाह का परिचय कराते हुए उससे जुड़ने का आमंत्रण दिया गया।

श्रद्धा संवर्धन, जनजागरण की दृष्टि से यह कार्यक्रम शानदार उपलब्धियों से भरा था। ११ फरवरी को हुए भूमिपूजन में नगर के ५०० से अधिक मीडिया, चिकित्सक, राजनीतिज्ञ, अधिवक्ता, शिक्षाशास्त्री आदि गणमान्य उपस्थित रहे। यज्ञस्थल पर लगाये गये पुस्तक मेले ने हजारों घरों तक युगऋषि का क्रांतिकारी साहित्य पहुँचाया।

कार्यक्रम सम्पन्न कराने शांतिकुंज से श्री अशोक ढोके की टोली पहुँची थी। पावन प्रज्ञा पुराण कथा श्रवण करने प्रतिदिन २००० से अधिक लोग उपस्थित रहते थे। इस कथा ने युवावर्ग में नवसृजन अभियान में भागीदारी की जबरदस्त प्रेरणा जगाई। परिणाम स्वरूप पूर्णाहुति के दिन २४ कन्याओं और २४ युवकों को मिशन की गतिविधियों से जुड़ने और विभिन्न रचनात्मक आन्दोलनों की बागडोर सँभालने के संकल्प दिलाये गये।

गोरखपुर के प्रमुख कार्यकर्त्ता श्री दीनानाथ सिंह के अनुसार श्रद्धा संवर्धन गायत्री महायज्ञ में सन् २०२० अश्वमेध महायज्ञ की रजत जयंती बड़े स्तर पर मनाने का उत्साह उभरा है। इस उपलक्ष्य में गायत्री परिवार के प्रत्येक घर में यज्ञ और १०८ वेदीय दीपयज्ञ करने का संकल्प लिया है।

१०८ कुण्डीय महायज्ञ से ५० गाँवों के लोगों में नवचेतना का संचार

गिरिडीह। बिहार
गिरिडीह जिले के द्वारपहरी जोरासाँख ग्राम में एक ऐतिहासिक १०८ कुण्डीय श्रद्धा संवर्धन गायत्री महायज्ञ सम्पन्न हुआ। गिरिडीह शाखा के प्रमुख कार्यकर्त्ता श्री कामेश्वर सिंह के अनुसार इसमें लगभग ५० गाँवों के एक लाख लोगों ने भाग लिया। शांतिकुंज प्रतिनिघ श्री नमोनारायण पाण्डेय की टोली ने इस कार्यक्रम में संस्कार परम्परा को जाग्रत करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।

यज्ञ में ४५० श्रद्धालुओं ने गायत्री महामंत्र की दीक्षा लेते हुए अपनी जीवन को उत्कृष्टता की ओर ले जाने के संकल्प लिए। १२०० बच्चों के मुण्डन संस्कार हुए, अन्य संस्कार भी सैकड़ों की संख्या में हुए। एक जोड़े का विवाह हुआ, जिसके माध्यम से हजारों लोगों ने आदर्श ग्रृहस्थ जीवन के सूत्रों को हृदयंगम किया।

महायज्ञ में प्रदर्शित युग साहित्य श्रद्धालुओं की आस्था और जिज्ञासा का केन्द्र रहा, जो एक विशाल पुस्तक मेले के रूप में दिखाई देता रहा। आयोजकों ने नि:शुल्क चिकित्सा शिविर भी लगाया।


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