Published on 2018-04-13
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जयपुर। प्रदेश में वैदिककाल से चली आ रही संस्कार परम्परा में शामिल पुुंसवन संस्कार की परिपाटी एक बार चलेगी। गर्भवती महिलाओं से जुड़ा यह संस्कार व्यापक स्तर पर कराया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार के चिकित्सा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। इस कड़ी में आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी विषय पर जबलपुर की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेज्ञ डॉ. अमिता सक्सेना और अलवर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सरोज रावत गर्भ में पल रहे शिशु को संस्कारवान बनाने के लिए पुंसवन संस्कार के महत्व पर व्याख्यान देंगी। व्याख्यानमाला 22 अप्रेल को शाम साढ़े पांच बजे से सी स्कीम स्थित महावीर स्कूल के सभागार में होगी। आयोजन से जुड़ी विभा अग्रवाल ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार और चेतना ग्राम संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में होनी वाली व्याख्यानमाला में अनेक गर्भवती महिलाएं, स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, स्वयंसेवी संस्थाओं की प्रतिनिधि तथा बुद्धिजीवी वर्ग के लोग भाग लेंगे। पुंसवन संस्काव्याख्यानमाला में दोनों स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पॉवर प्रजेटेंशन के माध्यम से यह बताएगी कि एक गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान अपनी दिनचर्या और मनोस्थिति को सुव्यवस्थित रखें तो वह एक स्वस्थ और सुशील संतान को जन्म दे सकती है। इसके लिए उन्हें पुंसवन संस्कार करवाना होगा। उल्लेखनीय है कि दोनों स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गत 11 साल से पुंसवन संस्कार को वैज्ञानिक ढंग से गर्भवती महिलाओं के समक्ष रखकर समाज को संस्कारवान पीढ़ी देने का कार्य कर रही है। इससे पूर्व 21 अप्रेल को गोनेर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में सामूहिक पुंसवन संस्कार करवाया जाएगा। इसमें अनेक महिलाओं का वैदिक पद्धति से पुंसवन संस्कार करवाया जाएगा। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा सहयोगिनियोंं का सहयोग लिया गया है। अखिल विश्व गायत्री परिवार राजस्थान जोन प्रभारी अम्बिका प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने पुंसवन संस्कार को अनिवार्य कर रखा है। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता गर्भवती महिला के घर जाकर पुंसवन संस्कार करवाने के लिए कहती है। बाद में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता सामूहिक रुप से यह निशुल्क संस्कार सम्पन्न करवाते हैं। ब्रह्मपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ तथा विभिन्न चेतना केन्द्रों पर यह संस्कार लम्बे समय से निशुल्क करवाया जा रहा है।
क्या है पुंसवन संस्कार: भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों का विधान है। गर्भाधान संस्कार के बाद दूसरा संस्कार पुंसवन है। हिन्दू धर्म में संस्कार परम्परा के अंतर्गत भावी माता-पिता को यह तथ्य समझाए जाते हैं कि शारीरिक, मानसिक दृष्टि से परिपक्व हो जाने के बाद ही समाज को श्रेष्ठ और तेजस्वी नई पीढ़ी देने के संकल्प के साथ ही संतान पैदा करने की पहल करें। गर्भ ठहर जाने पर भावी माता के आहार, आचार, व्यवहार, चिंतन भाव सभी को उत्तम और संतुलित बनाने का प्रयास किया जाए। उसके लिए अनुकूल वातवरण भी निर्मित किया जाए। गर्भ के तीसरे माह में विधिवत पुंसवन संस्कार सम्पन्न कराया जाए। क्योंकि इस समय तक गर्भस्थ शिशु के विचार तंत्र का विकास प्रारंभ हो जाता है। वेद मंत्रों, यज्ञीय वातावरण एवं संस्कार सूत्रों की प्रेरणाओं से शिशु के मानस पर तो श्रेष्ठ प्रभाव पड़ता ही है, अभिभावकों और परिजनों को भी यह प्रेरणा मिलती है कि भावी मां के लिए श्रेष्ठ मन:स्थिति और परिस्थितियां कैसे विकसित की जाए। यह संस्कार गायत्री परिवार के कार्यकर्ता घर-घर में निशुल्क करवाते हैं। हर रविवार को ब्रह्मपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ और विभिन्न चेतना केन्द्रों पर भी सुबह यह संस्कार निशुल्क रूप से करवाया जाता है।


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