Published on 2018-04-20
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२० हजार गाँव- शहरों के २ लाख नये भावनाशीलों को प्रज्ञा परिजन के रूप में विकसित करने का है लक्ष्य

राजस्थान प्रांत तीन वर्षीय अनुयाज योजना के अन्तर्गत सन् २०१८ में जनजागरण के एक विराट प्रयोजन को पूरा करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास कर रहा है। प्रस्तुत हैं कार्ययोजना के कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्दु

  • दो दिनों में ८३ टोलियों को बहुआयामी प्रशिक्षण दिया गया।
  • जून २०१८ में १४४ प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से १०,००० से अधिक नये कार्यकर्त्ताओं में कौशल एवं श्रद्धा संवर्धन का लक्ष्य है।
  • १७२३ स्थानों पर युग निर्माण सम्मेलन
  • ९६८ स्थानों पर श्रद्धासंवर्धन कार्यक्रम
  • ६ से ७ हजार गाँवों में साइकिल तीर्थयात्रा

जयपुर। राजस्थान
राजस्थान ने अश्वमेध रजत जयंती अनुयाज की तीन वर्षीय योजना का सुनियोजित क्रियान्वयन आरंभ कर दिया है। इसी क्रम में ३१ मार्च एवं १ अप्रैल की तारीखों में पूरे प्रान्त के आन्दोलन समूह प्रभारी, उपजोन एवं जिला समन्वयक- नियोजक एवं टोलियों में समयदान करने वाले कार्यकर्त्ताओं की कार्यशाला एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ। पूरे प्रांत के २५० से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने भाग लिया। दो दिनों में ८३ टोलियों को बहुआयामी प्रशिक्षण दिया गया।
शांतिकुंज से जोन समन्वयक श्री कालीचरण शर्मा जी एवं पश्चिम जोन प्रभारी श्री दिनेश पटेल ने प्रशिक्षण- मार्गदर्शन दिया, आन्दोलन समूहों की प्रगति की समीक्षा की, समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए प्रत्येक विषय के क्रियान्वयन के व्यावहारिक सूत्र प्रदान किए।

आगामी ८ से १२ जून और १३ से १७ जून की तारीखों में पूरे राजस्थान में १४४ शक्तिपीठ/चेतना केन्द्रों पर पाँच दिवसीय कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण शिविर आयोजित होंगे। इनके माध्यम से १०,००० से अधिक नये कार्यकर्त्ताओं में कौशल एवं श्रद्धा संवर्धन का लक्ष्य है।

  • वर्षाकाल में नवचेतना केन्द्र, शाखा, मण्डलवार गैर आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित होते रहेंगे।
  • १७२३ स्थानों पर युग निर्माण सम्मेलन/संगोष्ठियाँ होंगी। ऐसे १५५ सम्मेलन अब तक हो चुके हैं।
  • मई- जून से ९६८ स्थानों पर डेढ़ या ढाई दिवसीय श्रद्धासंवर्धन परक कार्यक्रमों की शृंखला आरंभ हो जाएगी।
  • ज्येष्ठ अधिक मास एवं कही- कहीं श्रावण में ग्रामतीर्थ साइकिल यात्राएँ (६ से ७ हजार गाँवों में)
  • १२००० शक्तिकलशों की स्थापना (६०५५ की स्थापना हो चुकी) से १२ लाख देव परिवारों का निर्माण।
  • इसके अलावा नदियों की स्वच्छता, पुनर्जीवन, वृक्षारोपण, स्वावलम्बन, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, युवा संगठन/दिया की सक्रियता, पुस्तक मेलों के आयोजन जैसे रचनात्मक आन्दोलनों के अनेक बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा हुई, भागीरथी संकल्प लिए गए। अलग- अलग जिलों के समन्वयक एवं प्रांतीय पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए।


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