Published on 2018-04-23

आदमी की नस्ल सुधारने का कार्य कर रहा देसंविवि : डॉ. महेश शर्मा
वैश्विक एकता एवं शांति के लिए गायत्री परिवार पूरे विश्व में सक्रिय : डॉ. पण्ड्याजी
रेनासा, संस्कृति संचार का हुआ विमोचन, डॉ. पण्ड्याजी ने अतिथियों को किया सम्मानित

हरिद्वार २३ अप्रैल।
केन्द्रीय संस्कृति व पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति का विकास तेजी से हो रहा है और जल्द ही हमारा देश पूरे विश्व का सांस्कृतिक नेतृत्व करेगा। उन्होंने यह बात देवसंस्कृति विवि में बाल्टिक संस्कृति एवं अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित 'उसिनदिएना पर्व' के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कही।

भारत में एशिया के प्रथम बाल्टिक सेंटर में 'उसिनदिएना पर्व' का शुभारंभ केन्द्रीय मंत्री डॉ. शर्मा, देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी, भारत में लातविया के राजदूत श्री एवरिस ग्रोजा ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर लातविया विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. मारसिस ऑजिंस, देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी आदि भी उपस्थित थे।

मृत्युजंय सभागार में आयोजित उक्त समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि बाल्टिक देशों सहित दुनिया भर में भारतीय संस्कृति का बोलबाला बढ़ा है। इसमें सबसे बड़ा योगदान पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी जैसे उन महापुरुषों का है, जिन्होंने अपने आध्यात्मिक तप से एक आदमी पर भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का अनूठा प्रयोग कर न केवल उसे सशक्त इंसान बनाया, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक राजदूत की तरह तैयार किया। अपने जीवन में घटी घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कई विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को डिग्री देकर अपना कर्त्तव्य पूरा मान लेते हैं, जबकि देसंविवि अपने विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला के साथ उसे अपने पैरों पर खड़ा होने तक शिक्षण देता है। उन्होंने कहा कि देसंविवि भारत की नस्ल को सुधारने का कार्य कर रहा है। मुझे विश्वास है कि यहाँ के युवा भारतीय संस्कृति का राजदूत बनकर विश्व के कोने- कोने में अलख जगायेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि जब देश आजाद हुआ था, तब एक नये भारत की शुरुआत हुई थी और इन दिनों उस दिशा में और तेज गति से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक एकता एवं शांति के लिए गायत्री परिवार पूरे विश्व में सक्रिय है, जिसका मुख्य स्तंभ संस्कृत, संस्कार व संस्कृति है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार समूची धरती को स्वर्ग बनाने की दिशा में काम रहा है, इसके लिए मानव मे देवत्व के संस्कार विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि दो वर्ष बाल्टिक देशों के बीच इस विश्वविद्यालय के माध्यम से सांस्कृतिक संबंध बने थे, जो इन दिनों काफी मजबूत हुए हैं। इसकी वजह वहाँ की भाषा शैली व संस्कृति है, जो भारत से काफी हद तक मेल खाती है।

भारत में लातविया के राजदूत श्री एवरिस ग्रोजा ने कहा कि देसंविवि में एशिया का प्रथम बाल्टिक सेंटर का शुभारंभ अगस्त २०१६ में हुआ था, उसके बाद से दोनों देशों के युवा शैक्षणिक माध्यमों से काफी करीब आये हैं और दोनों देशों के बीच शिक्षा ही नहीं, वरन् सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती आयी है। उन्होंने कहा कि लातविया के छात्रों को भारत की पारंपरिक शिक्षा पद्धतियों पर आधारित पाठ्यक्रमों के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। लातविया विवि के कुलाधिपति प्रो. मारसिस ऑजिंस ने कहा निकट भविष्य में लातविया में आयुर्वेद एवं परंपरागत शिक्षा पर आधारित की माँग बढ़ेगी, जिसे भारत को पूरा करना होगा। इस दौरान प्रो. मारसिस ने लातविया व भारत की शिक्षा प्रणाली पर आधारित एक पुस्तक देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी को भेंट किया।

इससे पूर्व देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्याजी ने भारत में एक और परिवार और घर के रूप में भारत में लातवियाई लोगों का स्वागत किया और कहा कि वे भारत के लोगों से अलग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं लातविया संस्कृति की तुलना करते हुए कहा कि दोनों देशों की संस्कृति में काफी समानता है। दोनों देशों के अनेक शब्द एवं परपंपराएँ एक जैसी हैं। इस अवसर पर देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने विवि की स्मृति चिह्न, युग साहित्य व शॉल ओढ़ाकार केन्द्रीय मंत्री डॉ. शर्मा, राजदूत श्री ग्रोजा, प्रो. ऑजिंस आदि अतिथियों का सम्मानित किया। तो वहीं लातविया से आये कलाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संगीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। तो वहीं सितार, वीणा, बांसुरी आदि वाद्ययंत्रों के माध्यम से संगीत विभाग के भाइयों को उपस्थित अतिथियों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम के समापन से पूर्व डॉ. पण्ड्याजी, डॉ. महेश शर्मा एवं श्री ग्रोजा ने विवि के ई बुक रेनासा, संस्कृति संचार का विमोचन किया। इस अवसर पर लातविया के आये शिक्षाविदों, कलाकारों के अलावा देसंविवि, गायत्री विद्यापीठ सहित अनेक गणमान्य नागरिक व पत्रकारगण उपस्थित थे।


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