Published on 2018-04-24
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मुजफ़्फ़रनगर के १०८ कुण्डीय यज्ञ में परम पूज्य गुरुदेव की शिक्षाओं के अनुसरण की प्रेरणा दी।

मुजफ्फर नगर। उत्तर प्रदेश
महर्षि अगस्त ने जैसे दो अंजलि में पूरा सागर भर लिया था, वैसे ही परम पूज्य गुरुदेव के व्यक्तित्व को यदि दो शब्दों में समेटना हो तो वे शब्द हैं प्रेम और करुणा। छलकती संवेदना, उफनती भावना जैसे शब्द ही उनके व्यक्तित्व का वास्तविक परिचय देते हैं।

देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने २८ से ३१ मार्च की तारीखों में मुजफ्फर नगर के गाँधी पॉलीटेक्निक कॉलेज में आयोजित १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किये। वे यज्ञ का लाभ लेने आये श्रद्धालुओं को युग परिवर्तन की सूत्र संचालक सत्ता परम पूज्य गुरुदेव, परम वंदनीया माताजी के साथ गायत्री महाशक्ति, यज्ञ आदि का बड़े सरल, व्यावहारिक शब्दों में परिचय दे रहे थे।

डॉ. चिन्मय जी ने कहा कि युग परिवर्तन जैसी विराट प्रक्रिया जन- जन के चिंतन, व्यवहार में परिवर्तन से ही संभव है। हमारा व्यक्तित्व कैसा हो, यह हमें परम पूज्य गुरुदेव से सीखना चाहिए। उपासना, साधना, यज्ञ, स्वाध्याय आदि को जीवन का अनिवार्य अंग बनाते हुए अपने जीवन में भी प्रेम, करुणा, सादगी, संस्कारों का अधिकाधिक समावेश करना चाहिए। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शेफाली पण्ड्या भी उनके साथ थीं।

शुक्रतीर्थ के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द जी एवं सोमांश प्रकाश भी प्रथम सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थे। उन्होंने अपने संदेश में पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए यज्ञीय परम्परा और मानसिक प्रदूषण को दूर करने के लिए संस्कार परम्परा के पुनर्जीवन की आवश्यकता समझायी। इस दिशा में गायत्री परिवार द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ कलश यात्रा से हुआ। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती अंजु अग्रवाल ने कलश पूजन कर इसका शुभारंभ किया। कार्यक्रम संचालन करने शांतिकुंज से सर्वश्री श्याम बिहारी दुबे, जितेन्द्र मिश्रा, गणेश पँवार, हेमराज तत्त्वदर्शी, अमर कुमार की टोली पहुँची थी।

मेरठ के कार्यकर्त्ताओं ने विशाल पुस्तक मेला लगाया। सैकड़ों की संख्या में दीक्षा एवं अन्य संस्कार हुए। यज्ञ में पालिकाध्यक्ष

डॉ. प्रदीप, विधायक कपिल देव अग्रवाल सहित अनेक गणमान्यों ने भी बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लिया। कार्यकर्त्ता गोष्ठी को संबोधित करने शांतिकुंज से जोन समन्वयक श्री कालीचरण शर्मा विशेष रूप से पधारे थे।

इस यज्ञ के माध्यम से जन- जन में युगशक्ति गायत्री एवं युग परिवर्तन के विराट अभियान के प्रति श्रद्धा संवर्धन का महान प्रयोजन पूरा हुआ। श्रीमती सोहनवीरी, आशीष मिश्रा, शारदा मिश्रा, रुकमिणी भारद्वाज, सरस्वती देवी, चंदना दीक्षित आदि अनेक भाई- बहनों ने इसकी सफलता में अविस्मरणीय योगदान दिया।


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