Published on 2018-04-24
img

"तीर्थ सेवन साधना सत्र" मलयालम केरल प्रदेश 24 से 28 अप्रैल 2018 गायत्री तीर्थ शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) में दक्षिण भारत ज़ोन द्वारा आयोजित किया गया।
भगवान परशुराम का क्षेत्र केरल प्रदेश के 80 मलयाली परिवार ने साधना शिविर में भाग लिया।

दक्षिण ज़ोन प्रभारी आद. डॉ. बृजमोहन गौड़ जी ने प्रथम सत्र में गुरुदेव के जीवन साधना दर्शन पर प्रकाश डाला। शान्तिकुञ्ज तपस्थली की दिव्यता, मै क्या हूँ ? का बोध कराया। साधना के बाद आराधना करने का क्रम अपने क्षेत्र में शुभारम्भ करें। क्रोध न करने का संकल्प कराया। बुराईयों को छोड़ें। घर-घर गायत्री मन्त्र जाप कराएंगे। बलसंस्कारशाला, वृक्षारोपड़ करना चाहिये। यज्ञ, दीपमहायज्ञ अखण्ड ज्योति पत्रिका सदस्यता के लिए मार्गदर्शन दिया।

"महाश्रमदान" माह की प्रत्येक 24 तारीख को शिविरार्थी और शान्तिकुञ्ज अन्तःवासी कार्यकर्त्ता सामूहिक मिल-जुल कर स्वच्छता श्रमदान करते हैं। केरल प्रदेश से आये हुए परिजनों ने भी आश्रम की साफ-सफाई में भाग लेकर आनन्दानुभूति की अपने क्षेत्र में भी यह स्वस्थ परम्परा चलाने और "स्वच्छ भारत अभियान" में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। आज दोपहर 2:30 बजे शान्तिकुञ्ज में गेट नं. 3 देवात्मा हिमालय क्षेत्र सफाई के लिये मिला। सभी भाई-बहिनों ने मिल कर सफाई की।


Write Your Comments Here:


img

11 जनवरी, देहरादून। उत्तराखंड ।

दिनांक 11 जनवरी 2020 की तारीख में देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी देहरादून स्थित ओएनजीसी ऑडिटोरियम में उत्तराखंड यंग लीडर्स कॉन्क्लेव 2020 कार्यक्रम में देहरादून पहुंचे जहां पर उन्होंने उत्तराखंड राज्य के विभिन्न.....

img

ज्ञानदीक्षा समारोह में लिथुआनिया सहित देश के 12 राज्यों के नवप्रवेशी विद्यार्थी हुए दीक्षित

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जो आचरण से शिक्षा दें वही आचार्य है और ऐसे आचार्यगण ही विद्यार्थियों को चरित्रवान बना सकते हैं। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह चाणक्य ने अपने ज्ञान व.....

img

ञानदीक्षा समारोह में लिथुआनिया सहित देश के 12 राज्यों के नवप्रवेशी विद्यार्थी हुए दीक्षित

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जो आचरण से शिक्षा दें वही आचार्य है और ऐसे आचार्यगण ही विद्यार्थियों को चरित्रवान बना सकते हैं। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह चाणक्य ने अपने ज्ञान व.....