Published on 2018-05-09

महात्मा गाँधी हॉस्पिटल में व्याख्यान- 'वैज्ञानिक अध्यात्मवाद- भविष्य का धर्म'

धर्मतंत्र की गरिमा गिराने वालों पर टिप्पणी करते हुए श्रद्धेय डॉ. साहबजी ने कहा-  ग्रंथों को रटने की नहीं, जीवन में उतारने की जरूरत है

गंगा स्नान से ज्यादा गंगा सफाई है पुण्यदायी : सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने से सारे पाप धुल जायेंगे, ऐसी अनेक रूढ़ियाँ चली आ रही हैं। न कभी किसी ने इनका दर्शन बताया, न इन मान्यताओं का खंडन किया। आज तो गंगा स्नान से कहीं ज्यादा पुण्य गंगा को साफ करने में भागीदारों को मिलता है। डॉ. प्रणव जी
 
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने २८ अप्रैल को सीतापुरा के महात्मा गाँधी हॉस्पिटल स्थित आर.एल. स्वर्णकार सभागार में 'वैज्ञानिक अध्यात्मवाद- भविष्य का धर्म' विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता हो या कोई अन्य धार्मिक ग्रंथ, इनको रटने की नहीं जीवन में उतारे की आवश्यकता है। जब तक इनकी शिक्षाएँ जीवन में नहीं उतरेंगी, तब तक अध्यात्म का सही स्वरूप जनता के सामने नहीं आएगा।

उन्होंने कहा कि अध्यात्म और विज्ञान में समन्वय जरूरी है। विज्ञान सुविधाओं के अंबार लगा रहा है, लेकिन विवेक की दृष्टि और चेतना का नियंत्रण न होने पर वे एक ओर परमाणु युद्ध और पर्यावरण असंतुलन जैसे विकराल संकट खड़े कर रहा है, वहीं मनुष्य को मशीनों का गुलाम बनाकर उसकी मौलिक क्षमताओं और विशेषताओं को क्षीण करता जा रहा है।

दूसरी ओर तथाकथित अध्यात्मवादी भी धर्म को व्यवसाय बनाते, ढोंग- ढकोसले करते, अंधविश्वास फैलाते और श्रद्धालुओं का विश्वास तोड़ते नज़र आते हैं। जिन पर लोगों को सादगी का पाठ पढ़ाकर सीमित साधनों में सुख- संतोष अनुभव करने की सीख देने का जिम्मा था, वे स्वयं भौतिकता के फेर में सुविधा- साधनों के अंबार जुटा रहे हैं।

धर्म और विज्ञान का समन्वय

परम पूज्य गुरुदेव ने कहा है कि वैज्ञानिक अध्यात्मवाद ही भविष्य का धर्म होगा। दोनों के समन्वय से ही युग की सारी समस्याओं का समाधान होगा। इसके लिए विवेकवान बुद्धिजीवियों के आगे आने की आवश्यकता है, जो धर्म के मर्म को समझें, उसे जीवन में उतारें और अपने जीवन से दूसरों को भी ऐसी ही प्रेरणा दे सकें।

मन को साधो

समस्याओं का कारण हम स्वयं हैं। जब तक हम अपने अंदर नहीं देखेंगे, तब तक समस्या की जड़ तक नहीं पहुँच पाएँगे। हमारा मन ही हमारा मित्र है और मन ही शत्रु। इसे साधने की जरूरत है। इसे साध लिया तो सिद्धियाँ मिलती जाएँगी।

सूर्य का ध्यान
उगते हुए सूर्य का ध्यान करो। इससे बुद्धि प्रखर होती है। आईक्यू और ईक्यू बढ़ता है। आत्मशक्तियाँ स्वत: जाग्रत होती हैं।

आरंभ में महात्मा गाँधी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. एम.एल. स्वर्णकार, इंडिया एजुकेशन ट्रस्ट की उपाध्यक्ष मीना स्वर्णकार, डॉ. हरि गौतम, डॉ. एम.सी. मिश्रा, डॉ. सुधीर सचदेवा ने श्रद्धेय डॉ. प्रणव जी का अभिनंदन किया। इस अवसर पर गायत्री परिवार के जोन प्रभारी श्री अम्बिका प्रसाद श्रीवास्तव, वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री वीरेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, श्री आलोक अग्रवाल, परिव्राजक श्री ताराचंद पंवार सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र के साथ तथा समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।


Write Your Comments Here:


img

anganwadi स्कूल मैं जाके गायत्री मंत्र और गायत्री माँ के चम्त्कार् के बारे मैं बताया

मैं यशवीन् मैंने आज राजस्थान के barmer के बालोतरा मैं anganwadi स्कूल मैं जाके गायत्री माँ के बारे मैं बच्चों को जागरूक किया और वेद माता के कुछ बातें बताई और महा मंत्र गायत्री का जाप कराया जिसे आने वाले.....

img

युग निर्माण हेतु भावी पीढ़ी में सुसंस्कारों की आवश्यकता जिसकी आधारशिला है भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा -शांतिकुंज प्रतिनिधि आ.रामयश तिवारी जी

वाराणसी व मऊ उपजोन की *संगोष्ठी गायत्री शक्तिपीठ,लंका,वाराणसी के पावन प्रांगण में संपन्न* हुई।जहां ज्ञान गंगा की गंगोत्री,*महाकाल का घोंसला,मानव गढ़ने की टकसाल एवं हम सभी के प्राण का केंद्र अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज,हरिद्वार* से पधारे युगऋषि के अग्रज.....

img

Yoga Day celebration

Yoga day celebration in Dharampur taluka district ValsadGaytri pariwar Dharampur.....