नारी सशक्तीकरण

Published on 2018-05-10
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महिलाएँ घर- घर बनाती थीं शराब, अब बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं उनके बनाये कृषि उत्पाद

कोरबा। छत्तीसगढ़

करतला ब्लॉक का ग्राम कोई कुछ दिनों पहले तक घर- घर शराब बनाने और वहाँ के लोगों के नशे में धुत रहने के लिए बुरी तरह बदनाम था। कुल ९९० लोगों की आबादी वाले इस गाँव की आय का स्रोत मुख्य रूप से वहाँ की महिलाएँ ही हैं। शुरू में इनमें से २० बहनों ने अपनी मानसिकता बदली, एकजुट होकर 'हरियाली गैंग' बनाई और शराब बनाना छोड़कर कम लागत वाले जैविक कृषि के एंजाइम एवं आयुर्वेद प्रोडक्ट बनाने लगीं। क्रमश: उनके उत्पादों की माँग बढ़ती गई। वे नई- नई चीजें बनाने लगीं। आज मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में उनके उत्पादों की इतनी माँग है कि वे एक कम्पनी बनाने की सोच रही हैं।

आज गाँव की ८० बहनें हरियाली गैंग से जुड़ी हैं। सभी सहकारी समिति बनाकर समूह में काम कर रही हैं। जीबीवीएस के सीईओ श्री डालेश्वर कश्यप समूह को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। हरियाली गैंग द्वारा निर्मित जामुन का सिरका, लक्ष्मीतरु, महुआ के लड्डू, बीजामृत, संजीवनी रस, केंचुआ खाद आदि उनके बनाए उत्पादों की माँग निरंतर बढ़ रही है। हरियाली गैंग की साहसी बहनों के कारण पूरा गाँव बरबादी से समृद्धि, शांति की ओर बढ़ चला है।

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