Published on 2018-05-18

सद्गुणों की खेती करना सिखाती है संस्कृतिः डॉ पण्ड्याजी
मेधावियों को किया गया सम्मानित, विद्यार्थियों ने कहा- अनमोल है यह सम्मान

हरिद्वार, १८ मई।

गायत्री परिवार के अभिभावक डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति सद्गुणों की खेती करना सिखाती है। जिस दिन संस्कृति जीवन में उतर जायेगी, उस दिन हमारा जीवन बदल जायेगा और हम महान बन जायेंगे। संस्कृतिनिष्ठ होने से ही सेवाभावी व सुसंस्कारी बना जा सकता है।

डॉ पण्ड्याजी शांतिकुंज में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के मेधावी विद्यार्थियों के प्रशिक्षण शिविर व सम्मान समारोह में आये प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। इस शिविर में बिहार, उप्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखण्ड, झारखण्ड सहित १५ राज्यों के राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर प्रावीण्य सूची में आये छात्र-छात्राएँ  एवं उनके अभिभावकगण सम्मिलित थे। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है। भारतीय संस्कृति मानव जीवन के विकास को उच्च स्तर पर ले जाने की कला सिखाती है। उन्होंने कहा कि सभ्यता बहिरंग है जो बाह्य जीवन पद्धति सिखाती है, जबकि संस्कृति अंतरंग है और विचारों का परिशोधन करते हुए आगे बढ़ना, पीड़ितों की सेवा करना सिखाती है। शिक्षा व विद्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा जहाँ सभ्यता के विकास एवं व्यावहारिक ज्ञान के संर्वधन के लिए आवश्यक है, वहीं विद्या अपने जीवन के उद्देश्यों को समझने, अनगढ़ता को सुगढ़ता में बदलने और जीवन जीने की कला के शिक्षण में रूप में जरूरी है। डॉ. पण्ड्याजी ने विद्या और अविद्या की भी विस्तार से जानकारी दी। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदीजी ने विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त करने के विविध उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीवन में ऊँचाइयों को छूना हो, तो महापुरुषों के जीवनी, श्रेष्ठ साहित्यों के नियमित रूप से अध्ययन करना चाहिए एवं सद्गुणों को जीवन में अपनाना चाहिए। इस अवसर पर अभिभावकद्वय व शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने मेधावी विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र आदि भेंटकर सम्मानित किया। पुरस्कृत हुए बच्चों ने कहा कि यह सम्मान अनमोल है।

इससे पूर्व प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री कपिल केसरी जी ने कहा कि आज के युवा वायु की दिशा को मोड़ने सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रगतिशील युवा बनने के लिए कठोर श्रम कर सद्ज्ञान प्राप्त करें फिर अपने व्यक्तित्व के माध्यम से समाज में एक मिसाल कायम करें। भासंज्ञाप के समन्वयक श्री प्रदीप दीक्षित के अनुसार शिविर के विभिन्न चरणों मेंविद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ शारीरिक व मानसिक विकास पर भी जोर दिया गया।

शिविर के दौरान हुए काव्यपाठ प्रतियोगिता एवं क्वीज प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किये गये। गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न राज्यों से आये मेधावी छात्र-छात्राओं का मन मोह लिया।


Write Your Comments Here:


img

डॉ. चिन्मय पंड्या की नीदरलैंड यात्रा

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पंड्या जी ने नीदलैंड्स की यात्रा के मध्य हेग में भारत के राजदूत श्री वेणु राजामोनी जी एवं उनकी सहधर्मिणी डॉ थापा जी से भेंट वार्ता की। इस क्रम में.....

img

डॉ. चिन्मय पंड्या की नीदरलैंड यात्रा

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पंड्या जी ने नीदलैंड्स की यात्रा के मध्य हेग में भारत के राजदूत श्री वेणु राजामोनी जी एवं उनकी सहधर्मिणी डॉ थापा जी से भेंट वार्ता की। इस क्रम में.....

img

डॉ. चिन्मय पंड्या की इक्वाडोर के राजदूत श्री हेक्टर क्वेवा के साथ भेंट

स्मृति के झरोखों से देव संस्कृति विश्वविद्यालय में इक्वाडोर के राजदूत श्री हेक्टर क्वेवा पधारे एवं विश्व विद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पंड्या जी से मुलाकात की। उनकी यात्रा के दौरान इक्वाडोर से आए प्रतिभागियों के.....


Warning: Unknown: write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0