Published on 2018-05-21

मई माह के तीसरे सप्ताह के दौरान प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ बिहार द्वारा, श्रीराम बालसंस्कारशाला बहादुरपुर में वार्षिकोत्सव का आयोजन, सामूहिक साधना एवं प्रार्थना शिविर, संगीत का कार्यक्रम एवं युवाओं के विशेष उद्बोधन का कार्य किया गया। इन कार्यक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट इस प्रकार है:-

श्रीराम बालसंस्कारशाला बहादुरपुर में वार्षिकोत्सव

१९ मई २०१८ को श्रीराम बालसंस्कारशाला बहादुरपुर का छठा वार्षिकोत्सव मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ० मृदुला कुमारी (अर्थशास्त्र विभाग कॉलेज ऑफ कॉमर्स पटना), प्रो० कीर्ति (मनोविज्ञान विभाग कॉलेज ऑफ कॉमर्स पटना), शैलेंद्र कुमार सिन्हा (Advocate Patna, High Court Patna) सतीश कुमार गुप्ता (वार्ड परिषद) संजय शर्मा (प्रधानाध्यापक) और प्रांतिये युवा प्रकोष्ठ के श्री मनीष कुमार जी, श्री निशांत रंजन जी, एवं युवा प्रकोष्ठ के द्वार चलाये जा रहे लगभग विभिन्न संस्कारशालाओं से लगभग ८० भाई उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में संस्कारशाला के बच्चे, अभिवावक एवं अगल- बगल के बस्ती से लगभग ८०० लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में मिशन से संबन्धित गीत संगीत श्रीराम बालसंस्कारशाला के बच्चों के द्वारा प्रस्तुत किया गया।

सामूहिक साधना एवं प्रार्थना शिविर
२० मई २०१८ के साप्ताहिक सामूहिक साधना एवं प्रार्थना शिविर के प्रातः कालीन सत्र में लगभग ५७५ युवाओं की उपस्थिति रही, जिसमें ६६ युवा नये थे। सभी युवाओं ने सामूहिक रूप से साधना एवं प्रार्थना करते हुए सद्विचारों का आत्मसात किया। २० मई के ही संध्याकालीन सत्र (५:०० बजे से ७:०० बजे) में यथावत चला जिसमें १०७५ युवाओं की उपस्थिती रही, इसमें ८३ युवा नये थे।

संगीत का कार्यक्रम:
सामूहिक ध्यान एवं प्रार्थना के बाद होने वाले संगीत सत्र में एक संगीत "हम युग का निर्माण करेंगे यह संकल्प हमारा है........, श्री सुबोध जी के द्वारा गाया गया। वहीं शाम की सभा में एक संगीत "गंगा की कसम यमुना की कसम......" श्री शशि कुमार जी के द्वारा गाया गया।
 युवाओं का विशेष उद्बोधन:आज युवा प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि श्री विकाश कुमार जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हर काम का दो पहलू होता है, सकारात्मक और नकारात्मक।

आप उन दो पहलुओं में से किसे चुनते हैं, यह आप पर निर्भर करता है।

इनके बाद श्री राजीव रंजन जी ने कहा कि अपना मूल्य समझो और नकारात्मक से बचो। चाहे कोई कितना भी बलवान क्यों न हो लेकिन एक नकारात्मक विचार किसी भी बलवान को धाराशाही कर देता है। वहीं शाम कि सभा में उन्होने कहा कि व्यक्ति की सुंदरता उसके बाहरी स्वरूप पर न होकर उसके आंतरिक स्वरूप पर निर्भर करता है। पहले अपने आप को श्रेष्ठ बनाएँ, फिर परिवार और समाज को।

इनके बाद श्री मुरली जी ने कहा कि हमें अपने जीवन में साधना का समावेश अवश्य करना चाहिए जिससे की हमें एक सही दिशाधारा मिल सके। चूँकि जब तक की हमारे जिंदगी में परिवर्तन नहीं होगा तब तक किसी दूसरे व्यक्ति से परिवर्तन की अपेक्षा नहीं किया जा सकता।

इनके बाद श्री निशांत रंजन जी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के अंदर अगर अध्यात्म का समावेश हो जाए तो वे अंदर से कभी भी मायूष नहीं होंगे, क्योंकि उसे ऐसे कई संघर्ष से सामना करना पड़ता है, उसे बड़ी से बड़ी विपत्ति भी तुच्छ मालूम पड़तीं है और वह उसका सामना बड़ी सरल तरीके से कर सकता है।

इनके बाद श्री निशांत रंजन जी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के अंदर अगर अध्यात्म का समावेश हो जाए तो वे अंदर से कभी भी मायूष नहीं होंगे, क्योंकि उसे ऐसे कई संघर्ष से सामना करना पड़ता है, उसे बड़ी से बड़ी विपत्ति भी तुच्छ मालूम पड़तीं है और वह उसका सामना बड़ी सरल तरीके से कर सकता है।

इनके बाद युवा प्रकोष्ठ के वरिष्ठ प्रतिनिधि श्री मनीष कुमार जी ने कहा कि हम कोई भी कार्य करना चाहते है तो उस कार्य के प्रति हमे दृढ़ संकल्प और विश्वास के साथ करना चाहिए तो उस कार्य में हमें अवश्य सफलता मिलती है। वहीं शाम कि सभा में उन्होने कहा कि मनुष्य को अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनना चाहिए अंतरात्मा की आवाज ही परमात्मा की आवाज होती हैं अध्यात्म मनुष्य को अंदर से शक्ति प्रदान करती हैं।


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