हिमालय है तो संस्कृति, गंगा व हम सब हैं :डॉ. प्रणव पण्ड्या

*हिमालय को गोद लेकर उसे हरा-भरा करने के लिए संकल्पित गायत्री *परिवार ,विवि के २३ विभिन्न पाठ्यक्रम के ६०९ नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने ली शपथ,विवि में अमेरिका, भूटान, ताईवान सहित भारत के २२ राज्यों के प्रतिनिधित्व
.


    हिमालय ज्ञान और संस्कृति का आदि स्रोत है, अनादि काल से ऋषियों ने यहाँ तप कर देव संस्कृति को जन्म दिया है। हिमालय है तो संस्कृति है, हिमालय है तो गंगा है, हिमालय है तो हम सब हैं। हिमालय नष्ट हो गया तो सब कुछ नष्ट हो जायेगा। आज ज्ञानदीक्षा के पावन अवसर पर हम सब हिमालय को गोद लेकर उसे संरक्षित करने का संकल्प लेते हैं।
    यह हृदयोद्गार और संकल्प कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युजंय सभागार में रविवार को आयोजित २३वें ज्ञानदीक्षा कार्यक्रम में व्यक्त किये। उल्लेखनीय है कि एक माह पूर्व उत्तराखंड में आयी भीषण प्राकृतिक आपदा से आहत देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिवार ने यह ज्ञानदीक्षा पर्व नवनिर्माण संकल्प पर्व के रूप में आयोजित किया था। उन्होंने हिमालय पर हो रहे अतिक्रमण, प्रदूषण एवं त्रासदी पर अपनी गहन वेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वे इसे मानवीकृत आपदा मानते हैं। यदि हम अब नहीं चेते, तो अपने आपको बचा नहीं पायेंगे। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने हिमालय को गोद लेकर उसे हराभरा बनाने का, गंगा को निर्मल बनाने का, आपदाग्रस्त गाँववासियों के पुनर्वास का संकल्प दिलाया। उन्होंने शांतिकुंज द्वारा आपदाग्रस्त लाखों लोगों को त्वरित राहत दिलाने के लिए सीबीआरआई द्वारा प्रस्तावित मॉडल वाले मकानों से २०-२५ मकानों के छोटे-छोटे गाँव आपदाग्रस्त क्षेत्रों में बसाने की योजना की बतायी। अनाथ हुए बच्चे, बूढ़े, विधवाओं को संरक्षण देने का आश्वासन दिया। ज्ञानदीक्षा के क्रम में विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों के हाथों में एक-एक पौध देकर हिमालय क्षेत्र में सघन वृक्षारोपण और उनका संरक्षण करने के संकल्प दिलाये गये।
    आपदा राहत कार्यों में गायत्री परिवार द्वारा पहला स्थान प्राप्त करने की जानकारी देते हुए शांतिकुंज द्वारा किये गये कार्यों का संक्षिप्त उल्लेख भी डॉ. प्रणव पण्ड्या ने किया। उन्होंने बताया कि शांतिकुंज ने आपदा राहत कार्यों के पहले तीन दिनों में एक लाख भोजन के पैकेट आपदाग्रस्तों तक पहुँचाये। २७ मई को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने रुद्रप्रयाग पहुँचे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के २७ विद्यार्थियों के दल की उन्होंने विशेष रूप से सराहना की, जो आपदा के समय वहीं थे। अपने सामने मकान और लाशों को बहते देखने वाले इन विद्यार्थियों ने पूरी हिम्मत से काम लिया और पीड़ितों की सेवा में डटे रहे।
    इससे पूर्व मुख्य अतिथि मनीषी पं वीरेश्वर उपाध्याय ने विद्यार्थियों को ज्ञानार्जन का सही उद्देश्य और दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने जीवन को समग्रता से देखा है, इसलिए जीवन के हर पक्ष को महत्त्व दिया है। आज की विडंबना है कि शक्ति और साधन संचय के प्रयास तो खूब हो रहे हैं, लेकिन उनके संयम और सदुपयोग की उपेक्षा की जा रही है। यही अनियंत्रित और उच्छृंखल होकर आज विनाशकारी सिद्ध हो रहे हैं।
    प्रज्ञा अभियान के सम्पादक श्री उपाध्याय ने कहा कि जो आदर्शों को व्यावहारिक बना दे, वही विद्या है। हमारे कुलपिता पं० श्रीराम शर्मा आचार्य ने हर आदर्श को व्यावहारिक बनाने की साधना की और सफल हुए। हमारे विद्यार्थियों को भी उनका अनुसरण करते हुए ज्ञानार्जन से जीवन में समग्र विकास के प्रयास करने चाहिए। श्री उपाध्याय जी ने कहा कि ज्ञानदीक्षा एक अच्छी शुरुआत है। अच्छी शुरुआत आधी सफलता होती है। देश में ऐसे व्यक्ति पैदा होने लगें, जो समस्याएँ खड़ी न करें बल्कि समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करें। जनसम्पर्क व सेवा योजन विभाग समन्वयक महेन्द्र शर्मा ने बताया कि ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम में अमेरिका, भूटान, ताईवान व भारत के २२ राज्यों के विद्यार्थी देसंविवि के २३ विभिन्न पाठ्यक्रमों में ६०९ नवप्रवेशी छात्र-छात्राएँ सम्मिलित थीं।
    ज्ञान दीक्षा के अवसर पर उपस्थित देवसंस्कृति विवि परिवार, गायत्री विद्यापीठ परिवार एवं सैकड़ों अतिथियों ने एक-एक पौधा रोपने एवं उसे संरक्षित करने का संकल्प लिया। ज्ञानदीक्षा कार्यक्रम का वैदिक कर्मकाण्ड श्री सूरज प्रसाद शुक्ल ने किया, तो वहीं कार्यक्रम के समापन पर कुलपति डॉ. सुखदेव शर्मा ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन गोपाल शर्मा व कु. पूर्वा सूरजन ने किया। इस अवसर पर प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव संदीप कुमार सहित विवि के समस्त स्टाफ एवं शांतिकुंज कार्यकर्त्ता एवं मीडिया से जुड़े अनेक पत्रकारगण उपस्थित थे।
क्या है ज्ञान दीक्षा? छात्र जब स्नातक बनने के संकल्प के साथ महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेता है, तभी वह स्नातक साधना के लिए दीक्षित होता है। इसी क्रम में पढ़ाई आरंभ होने से पूर्व आचार्य एवं नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को  संकल्प सूत्र में बाँधा जाता है, इसी प्रक्रिया का नाम ‘ज्ञान दीक्षा’ है।






Write Your Comments Here:


img

गुरु पूर्णिमा पर्व प्रयाज

गुरु पूर्णिमा पर्व पर online वेब स्वाध्याय के  कार्यक्रम इस प्रकार रहेंगे समस्त कार्यक्रम freeconferencecall  मोबाइल app से होंगे ID : webwsadhyay रहेगा 1 गुरुवार  ७ जुलाई २०२२ : कर्मकांड भास्कर से गुरु पूर्णिमा.....

img

ऑनलाइन योग सप्ताह आयोजन द्वादश योग :गायत्री योग

परम पूज्य गुरुदेव द्वारा लिखित पुस्तक  गायत्री योग, जिसके अंतर्गत द्वादश योग की चर्चा की गई है, का ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पांच दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया| इस कार्यक्रम में विशेष आकर्षण वीडियो कांफ्रेंस.....

img

गृह मंत्री अमित शाह बोले- वर्तमान एजुकेशन सिस्टम हमें बौद्धिक विकास दे सकता है, पर आध्यात्मिक शांति नहीं दे सकता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम उन गतिविधियों का समर्थन करते हैं जो हमारे देश की संस्कृति और सनातन धर्म को प्रोत्साहित करती हैं। पिछले 50 वर्षों की अवधि में, हम हम सुधारेंगे तो युग बदलेगा वाक्य.....