Published on 2018-05-24

७० इंजीनियरों की 'टीम' ने पिछड़े- गरीब बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया

भिलाई। छत्तीसगढ़
डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन छत्तीसगढ़ और एक स्वयंसेवी संस्था 'पहल' ने मिलकर नवोदित पीढ़ी का भविष्य सँवारने के लिए 'टीम (टीचिंग फॉर एम्पावरमेण्ट एण्ड मॉरल्स)' का गठन किया है, जिसका उद्देश्य झुग्गी- झोंपड़ियों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के साथ उनमें नैतिक मूल्यों का विकास करना है। इं. अफरोज़ आलम के नेतृत्व में इसमें ७० से अधिक युवा जुड़े हैं।

बाल निर्माण की एक नई शुरुआत हुई। जवाहर नगर, भिलाई के प्रधानमंत्री आवास में रह रहे बच्चों को पढ़ाने का दायित्व इं. आसिफ रजा और आयुष कुमार सिंह ने लिया है। पिछले दो वर्षों से बाल सुधार गृह में दिया द्वारा चलाई जा रही साप्ताहिक कक्षाओं का उत्तरदायित्व भी अब इसी टीम के श्री रोहनचंद्र पाण्डेय सँभाल रहे हैं। उन्नाव और कठुआ की घटनाओं के बाद टीम की हर्षा, कीर्ति और अन्य सदस्या ५ से १५ वर्ष तक की बच्चियों को आत्म सुरक्षा का प्रशिक्षण दे रही हैं।

वॉइस आॅफ प्रज्ञा
सुर और संस्कारों में निखार

उज्जैन। मध्य प्रदेश : श्री गोविंद श्रीवास्तव, जबलपुर के मार्गदर्शन में लगातार चौथे वर्ष आयोजित हो रही प्रज्ञागीत गायन प्रतियोगिता 'वॉइस आॅफ प्रज्ञा' के अंतर्गत ३० अप्रैल को उज्जैन में जिला स्तरीय प्रतियोगिता अयोजित हुई। ७ से १३, १४ से १७ और १८ से २५ वर्ष वय ग्रुपों में कुल २१ प्रतियोगियों ने इसमें भाग लिया। उपजोन समन्वयक श्री महाकालेश्वर श्रीवास्तव एवं अन्यों ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये।
मुख्य निर्णायक श्री गोविंद श्रीवास्तव ही थे, जिन्होंने बच्चों को गायन की बारीकियाँ समझायीं। प्रतियोगिता के एक अन्य संचालक श्री ओम प्रकाश सेन ने बताया कि इन विजेताओं को नवम्बर में आयोजित होने वाली प्रांतीय प्रतियोगिता में सीधे प्रवेश दिया जायेगा।

प्रोजेक्ट संवेदना
खुशी बाँटने की खुशी ही निराली है

मुम्बई। महाराष्ट्र : दिया, मुम्बई से जुड़े सहृदय दम्पती हर्षल और गायत्री परम पूज्य गुरुदेव के बताये सूत्र 'बस एक ही मंत्र प्यार! प्यार!! प्यार!!!' को अपनाते हुए अपनी सेवा- संवेदना से समाज में सद्भावों का संचार कर रहे हैं। इस दम्पति ने वर्ष २०१७ का अंतिम दिन लोअर परेल, मुम्बई स्थित सैण्ट ज्यूदास चाइल्ड वैलफेअर में कैंसर पीड़ित बच्चों के साथ बिताया। बच्चों के प्यार के वशीभूत होकर उन्होंने जब भी अवसर मिले, उनके बीच पुन: आने का आश्वासन दिया।

१३ और १४ अप्रैल क्रमश: हर्षल और गायत्री के जन्म दिवस थे। उन्होंने अपना जन्मदिन फिर उन्हीं कैंसर पीड़ित बच्चों के बीच जाकर सामूहिक रूप से मनाया। उन्हें टुथपेस्ट, शैम्पू, तेल, साबुन जैसे उपहार दिये, उनके साथ अच्छी बातें बाटीं, खेले। आत्मीयता विस्तार का यह तरीका भी निराला था, जिसमें उन्हें अपने भीतर आत्मसंतोष और आनंद की दिव्य अनुभूति होती रही और गुरुसत्ता के देव परिवार के विस्तार का प्रयोजन पूरा होता दिखाई दिया।


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