Published on 2018-05-26
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सभी १६० गाँवों में लगायेंगे पुस्तक मेले

  • गतवर्ष २२ गाँवों के ५७१३ घरों से संपर्क कर लगभग ढाई लाख रुपये का साहित्य पहुँचाया
पाटन। छत्तीसगढ़
अपने जीवन के प्रेरक, पालक, संरक्षक परम पूज्य गुरुदेव का डाकिया बनने का आनन्द ही कुछ और है। जो लोग उनके विचारों का पढ़ते हैं, प्रभावित होते हैं, उनसे मिलने वाले सम्मान से प्राप्त आनन्द की अनुभूति अनिर्वचनीय है। ऐसे ही दिव्यानन्द से भावविभोर पाटन के कर्मठ कार्यकर्त्ता सर्वश्री हरीश चंद्राकर, डॉ. अंकट मढ़रिया, एस.आर. बांधे, जागेश्वर सोनी, अवध पटेल, मेघनाथ पटेल इस जुलाई २०१८ से पुस्तक मेलों की शृंखला पुन: प्रारंभ कर रहे हैं। इस वर्ष ४२ गाँवों में पुस्तक मेले लगाने के स्थान निश्चित कर लिये गये हैं।
श्री हरीश चंद्राकर जी के अनुसार गतवर्ष २२ गाँवों में पुस्तक मेले लगाये गए। इनके माध्यम से ५७१३ घरों में कुल २४८८०० रुपये का साहित्य लोगों तक पहुँचाया।
पाटन शाखा ने मेले से पूर्व घर- घर संपर्क कर लोगों की श्रद्धा के अनुसार साहित्य की रसीद देने की नीति अपनाई है। पूरे गाँव में घर- घर संपर्क किया जाता है। तत्पश्चात उस गाँव के किसी विद्यालय में प्रधानाचार्य एवं सरपंच की उपस्थिति में शुक्रवार- शनिवार को पुस्तक मेले लगाए जाते हैं। वहाँ आकर परिजन अपनी पसंद का साहित्य ले जाते हैं। जो नहीं आ पाते, परिजन उन तक अपनी पसंद का साहित्य पहुँचा देते हैं। परम वंदनीया माताजी के जन्म शताब्दी वर्ष- २०२६ तक सभी १६० गाँवों के घर- घर तक युग साहित्य पहुँचाने का पाटन शाखा का संकल्प है।


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