Published on 2018-05-28
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अनेक बंदी कर रहे हैं नियमित उपासना- अनुष्ठान

  • सक्रिय हैं बंदियों के ५०- ५५ समूह
  • महिला कारागार में भी चल रहा है पुस्तकालय

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश

बंदियों के विचार और भविष्य को बदलने के लिए केन्द्रीय कारागार नैनी में चलाया जा रहा पुस्तकालय एक आदर्श है। वहाँ वेद, पुराण, उपनिषद् सहित ७००- ८०० पुस्तकें स्थापित की गई हैं। डॉ. सुनीत कुमार एम.डी. (रेडियोलॉजिस्ट) के सौजन्य से अखण्ड ज्योति- २५०, युग निर्माण योजना- १०० और प्रज्ञा अभियान भी नियमित रूप से पहुँच रहे हैं। बंदी भावेश कुमार कोमल उर्फ बाबाजी इन्हें बंदी अर्जुन, राजापति, अम्बरीष तिवारी, मंगल चौरसिया, विपिन केसरवानी, घनश्याम, उस्मान, इस्माइल नकबी के सहयोग से झोला पुस्तकालय के रूप में सभी बंदियों तक पहुँचाते हैं।

नैनी कारागार की पाँच सर्कल और हर सर्कल में पाँच बैरक हैं। उनमें ५०- ५५ समूह बनें हैं जिन्में प्रति सप्ताह ४ से १० पुस्तकें दी जाती हैं और अगले सप्ताह बदली जाती हैं। पास के महिला कारागार में भी सुश्री मालती के सहयोग से इसी प्रकार झोला पुस्तकालय चलाया जा रहा है।

गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे झोला पुस्तकालयों का बंदियों की मानसिकता पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनकी बढ़ती आस्था और बदलते विचारों का ही प्रभाव है कि गत नवरात्रि में १९ पुरुष व २ महिला बंदियों ने २४००० गायत्री महामंत्र जप और ७ बंदियों ने २४०० गायत्री महामंत्र लेखन अनुष्ठान किये। रामनवमी के दिन गायत्री शक्तिपीठ पर उन सभी के नाम से पूर्णाहुति की गई।

स्थानीय वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री देवब्रत साहा राय के अनुसार प्रसन्नता की बात है कि जेल प्रशासन के भावभरे सहयोग से सैकड़ों बंदी परम पूज्य गुरुदेव के विचारों से प्रभावित होकर उपासना, साधना का दैनिक क्रम चला रहे हैं। वे अपनी मानसिकता को बदलकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए उत्साहित हैं। विचार क्रांति अभियान की इस शानदार सफलता में वरिष्ठ जेलर श्री बालकृष्ण मिश्रा, डिप्टी जेलर श्री शिवसरन एवं श्री प्रभाकर प्रकाश अवस्थी के साथ गायत्री परिवार के नैष्ठिक कार्यकर्त्ता अवधेश सिंह, सरयू प्रसाद विश्वकर्मा, जगतपाल गुप्ता, पंकज मिश्रा, जे.के. जोशी, आर.पी. द्विवेदी, आर.के. सिंह आदि का विशेष योगदान है।


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