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अगस्त के अंत से आरंभ होगा घर- स्कूलों का पुनर्निर्माण: डॉ. प्रणव पण्ड्या

उत्तराखंड त्रासदी से पीड़ितों के दर्द को बँटाते हुए गायत्री परिवार ने अब तक सवा करोड़ रुपये की राहत सामग्री का वितरित किया है। इसमें भोजन के पैकेट, नाश्ता के पैकेट, राशन किट, बर्तन किट, तिरपाल, कंबल, स्टोव, सोलर लालटेन, टॉर्च, कपड़े, पानी, पशुओं हेतु चारा आदि सामग्री शामिल हैं।

शांतिकुंज के कंप्यूटर कक्ष में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह जानकारी शांतिकुंज आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा यहाँ के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को दी गयी। बैठक में वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की। अलग- अलग जिलों में सक्रिय आपदा प्रबंधन टोलियों ने अपने जिले की विस्तृत जानकारियाँ प्रदान कीं। उल्लेखनीय है कि शांति
कुं की आपदा प्रबंधन टोलियों ने सीधे प्रभावितों तक गाँव- गाँव पहुँचकर उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी है। उनकी साहसपूर्ण सेवा की सभी सदस्यों ने मुक्त कंठ से सराहना की। गोष्ठी में शामिल शांतिकुंज प्रतिनिधियों ने गरीब व असहाय लोगों की हर संभव मदद कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सहायता करने का आश्वासन दोहराया।

आपदा पीड़ितों के लिए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज में कुटीर उद्योग प्रशिक्षण की व्यवस्था बनाई गयी है। एक मासीय तथा तीन मासीय इस प्रशिक्षण शिविर में आवास, भोजन एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था पूरी तरह निरूशुल्क है। शांतिकुंज द्वारा पहाड़ के कई गाँवों का पुनर्निर्माण किया जायेगा। आपदा राहत एवं पुनर्वास के कार्यों में जैन समाज, पहल संस्था, साध समाज (नई दिल्ली), राष्ट्रीय एकता परिषद्, वर्धमान संस्कार धाम (मुंबई), जायंट्स ग्रुप ऑफ चैपाटी (मुंबई) सहित 30 से अधिक संस्थाएँ शांतिकुंज का सहयोग कर रही हैं।

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या ने कहा कि यह कार्य लम्बे समय तक चलना है। गायत्री परिवार उत्तराखंड के पूर्ण अध्यात्मीकरण हेतु कटिबद्ध रहेगा एवं प्रयास करेगा कि पुनर्वास- प्रबंधन द्वारा उत्तराखंड को ही नहीं, पूरे हिमालय क्षेत्र को आपदा मुक्त एवं तपोभूमि जैसा बना सकें। उन्होंने बताया अगस्त के अंतिम सप्ताह से उत्तराखंड के चयनित गाँवों में पीड़ितों के मकान, स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक भवनों के निर्माण कार्य प्रारंभ किया जायेगा।

आपदा प्रबंधन विभाग के राकेश जायसवाल के अनुसार मानवाधिकार अन्वेषक की महानिदेशक श्रीमती कंवलजीत सिंह कौर की टीम ने भी गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे राहत कार्यों की सराहना की है, वहीं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के अधिशासी निदेशक सतेन्द्र जी के नेतृत्व में आये केन्द्रीय पर्यवेक्षकों ने शांतिकुंज की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की। राकेश जायसवाल के अनुसार हरिद्वार में बाढ़ से घिरे 9 गाँवों में राहत सामग्री के अलावा पशुओं हेतु 443 कुंतल चारा वितरित किया गया है। देहरादून के कालसी ब्लॉक व ऋषिकेश के निकटवर्ती दर्जन भर से अधिक गाँवों में राहत कार्य किए गये। पिथौरागढ़ जिले के 51 गाँव, चमोली के तीन गाँव, रुद्रप्रयाग के 24 गाँव एवं 4 विद्यालय, टिहरी के 18 गाँव व 13 विद्यालय तथा उत्तरकाशी के 9 गाँवों में राहत सामग्री पहुँचाई गयी। उन्होंने बताया कि यह क्रम अगले 6 महीने तक जारी रहेगा। इस कार्य में आपदा प्रबंधन दल की प्रशिक्षित नौ टोलियाँ पिछले 18 जून से ही राहत एवं पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं। एक टोली में 20 से 50 स्वयंसेवक भाई शामिल हैं। इससे पूर्व 16 जून को आयी इस त्रासदी में असमय कालकवलित हुई आत्माओं की शांति एवं सद्गति हेतु 2 मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।


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