Published on 2018-06-11

गायत्री परिवार का मूल उद्देश्य है आत्मीयता विस्तार: डॉ. पण्ड्याजी

हरिद्वार ११ जून।
अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि गायत्री परिवार का मूल उद्देश्य आत्मीयता का विस्तार करना है। भगवान् राम ने रीछ वानरों के साथ, श्रीकृष्ण ने ग्वालबालों से आत्मीयता का विस्तार कर उनसे बड़े- बड़े काम करवाये। वर्तमान समय में युगऋषि पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी के निर्देशन में शांतिकुंंज वनवासी भाई- बहिनों से लेकर समाज के प्रत्येक वर्ग से पौरोहित्य से लेकर समाज विकास के विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं। ऐसे ही कर्मठ सेवाभावी समूह का नाम गायत्री परिवार है।

डॉ. पण्ड्याजी दण्डकारण्य, बस्तर (छत्तीसगढ़) से आये युवाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दण्डकारण्य क्षेत्र के विकास के लिए बाल संस्कारशाला, स्वावलंबन से लेकर विविध कार्य योजना तैयार की जा रही है। जो दण्डकारण्य के विकास की भूमिका निभायेगा। साथ ही छत्तीसगढ़ के बस्तर, महासमुन्द सहित सात जिलों, ओडिशा के गोरखपुर, नवरंगपुर, मलकानगिरी एवं मध्यप्रदेश के मण्डला, बालाघाट आदि जिलों के वनवासी बहुल क्षेत्रों के विकास में गायत्री परिवार सक्रिय है। यहाँ चलाये जा रहे कार्यक्रमों को और गति दी जायेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले कुछ वर्षों में यह वनवासी क्षेत्र विकास की नई परिभाषा गढ़ता हुआ दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि वनवासियों के बीच किये जाने वाले कार्यों में शिक्षा, स्वास्स्थ्य, स्वावलंबन, सामाजिक समरसता एवं श्रद्धा संवर्धन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि दण्डकारण्य परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक जिलों में एक- एक आरण्यक केन्द्र की स्थापना की जा रही है और इसका मुख्यालय कोण्डागाँव- बस्तर में होगा।

छत्तीसगढ़- ओडीशा जोन के समन्वयक श्री गंगाधर चौधरी ने कहा कि इन राज्यों के वनवासी भाई- बहिनों को शिक्षा के साथ- साथ स्वावलंबी बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्हें कुटीर उद्योग के प्रशिक्षण के साथ- साथ उसके लिए बाजार भी उपलब्ध कराने की योजना बनायी जा रही है, जिससे वे अपनी भौतिक स्थिति में सुधार ला सके। इसके लिए शांतिकुंज एवं स्थानीय प्रशिक्षकों की टीम सतत सक्रिय है। रचनात्मक प्रकोष्ठ के प्रभारी श्री केदार प्रसाद दुबे ने बताया कि शांतिकुंज के प्रशिक्षकों के साथ स्थानीय युवाओं की टीम वनवासी लोगों के विकास कार्य में जुटी है।

इस अवसर पर दण्डकारण्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र से आये युवाओं की टीम के अलावा छग के युवा प्रकोष्ठ के समन्वयक ओमप्रकाश राठौर, दिलीप पाणिग्रही आदि उपस्थित थे। वहीं शांतिकुंज में वनवासी क्षेत्र के विकास की कार्ययोजना को मूर्तरूप देने एवं देखरेख के लिए एक अलग प्रकोष्ठ का शुभारंभ हुआ। इसकी जिम्मेदारी नेमूराम साहू, ओमप्रकाश राठौर को सौंपी गयी है।


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