Published on 2018-06-20

वडोदरा में आयोजित विशाल कार्यकर्त्ता गोष्ठी में ७००० से अधिक गाँवों के सतत मंथन की योजना बनी

वडोदरा। गुजरात
स्नेह सलिला परम वंदनीया माताजी की पावन उपस्थिति में सन् १९९३ और १९९४ में क्रमश: वडोदरा और राजकोट में अश्वमेध महायज्ञ सम्पन्न हुए थे। देव संस्कृति दिग्विजय अभियान को गति देने में इनकी असाधारण भूमिका सर्वविदित है। ३० दिसम्बर २०१८ से ३ जनवरी २०१९ तक की तारीखों में अश्वमेध महायज्ञ, वडोदरा का रजत जयंती समारोह आयोजित हो रहा है। अगले वर्ष राजकोट में ऐसा ही कार्यक्रम होगा। इन्हें लेकर गुजरात के प्राणवान- श्रद्धावान कार्यकर्त्ताओं में फिर वैसे ही आश्वमेधिक पुरुषार्थ का उत्साह उमड़ रहा है। इस बार का लक्ष्य है समग्र गुजरात के ७००० गाँवों का सतत मंथन करना और हर गाँव में न्यूनतम २४- २४ युग साधक देव परिवारों का गठन करना।

सक्रियता की धुरी होंगे शक्तिपीठ
दिनांक २० मई को गायत्री शक्तिपीठ खटंबा पर केन्द्रीय जोन समन्वयक श्री दिनेश पटेल की मुख्य उपस्थिति में समग्र गुजरात के प्रमुख कार्यकर्त्ताओं की विशाल गोष्ठी आयोजित हुई। जोनल केन्द्र प्रतिनिधि श्री राजूभाई दवे, श्री अश्विन जानी, श्री जयेश बारोट, उपजोन वडोदरा के समन्वयक श्री महेन्द्र पटेल, शक्तिपीठ खटम्बा के युवा प्रबंधक श्री गिरीश पटेल, अश्वमेध यज्ञ वडोदरा के संयोजक श्री नवनीत पटेल, सारसा सहित सभी ३३ जिलों के जिला समन्वयक, आठों उपजोनों के समन्वयक, वडोदरा उपजोन की सभी तहसीलों के समन्वयक, ग्राम- शहरों के प्रतिनिधि सहित १२०० कार्यकर्त्ता भाई- बहनों ने इस गोष्ठी में भाग लिया।
केन्द्रीय प्रतिनिधि श्री दिनेश पटेल ने आगामी सात माह के प्रयाज कार्यों को रजत जयंती समारोह की सफलता का आधार बताया। उन्होंने प्रयाज की विस्तृत कार्ययोजना भी प्रस्तुत की, सभी ने बड़े उत्साह के साथ इसका अनुमोदन किया। उन्होंने कहा कि समग्र योजना की धुरी गायत्री शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ होंगे। गुजरात के पास श्रद्धा, सक्रियता और धन- संसाधनों की अकूत सम्पदा है। यदि सुनियोजित ढंग से इनका उपयोग कर लिया जाय तो हम गुजरात के गाँव- गाँव, घर- घर तक युगचेतना का प्रकाश पहुँचा सकते हैं। यहाँ प्रयाज की कार्य योजना सार- संक्षेप में प्रस्तुत की जा रही है।

'शक्ति संवर्धन वर्ष' एवं 'मातृशक्ति श्रद्धांजलि महापुरश्चरण' के परिप्रेक्ष्य में पूरे देश में अपनाई जा सकती हैं विचार क्रांति अभियान को गति देने वाली ऐसी योजनाएँ
गुजरात में गाँव- गाँव के मंथन की यह योजना प्रस्तुत शक्ति संवर्धन वर्ष और परम वंदनीया माताजी के जन्म शताब्दी वर्ष- २०२६ तक चलने वाले 'मातृशक्ति श्रद्धांजलि महापुरश्चरण को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से बनाई गई है। इसके द्वारा संगठित प्रयासों से संगठन सशक्तीकरण और शक्ति संवर्धन का अभीष्ट लक्ष्य पूरा होगा। जिनमें नये समाज की संरचना में भागीदारी का उत्साह है, उनके समयदान का शानदार नियोजन हो सकेगा। ऐसी योजनाएँ पूरे देश में बनाई जानी चाहिए।

प्रज्ञा अभियान का सहयोग लें
प्रज्ञा अभियान सत्कर्मों की उमंग जगाने वाली गंगा है। इसे पढ़ने वाले नये लोगों में सत्प्रवृत्तियों में सहयोगी बनने की सहज उमंग उठती है। इसे गाँव- गाँव, घर- घर पहुँचाने की आवश्यकता है।

अश्वमेध महायज्ञ रजत जयंती समारोह, वडोदरा
दिनांक ३०, ३१ दिसंबर २०१८ एवं १ से ३ जनवरी २०१९
प्रयाज कार्यक्रमों की रूपरेखा
•  समस्त गुजरात के प्रत्येक शक्तिपीठ/प्रज्ञापीठ न्यूनतम २४- २४ गाँवों को गोद लेंगे। इस प्रकार गुजरात के ७००० गाँवों के मंथन की योजना है। शहरों में एपार्टमेण्ट और मोहल्लों को ग्राम की इकाई माना जायेगा, लेकिन शक्तिपीठें केवल शहर नहीं, वास्तविक गाँवों को भी गोद लेंगी।
• प्रत्येक गाँव के न्यूनतम २४ नये परिवारों को 'युग साधक परिवार' के रूप में विकसित किया जायेगा।
• टोली गठन : प्रत्येक जिले में पूर्व प्रशिक्षित कार्यकर्त्ता भाई- बहिनों की २४ टोलियों का गठन हो। समयानुसार इनका पुन: प्रशिक्षण हो। ये टोलियाँ शक्तिपीठों द्वारा गोद लिए गये गाँवों की जिम्मेदारी सँभालें और रजत जयंती कार्यक्रम तक उन गाँवों का सतत मंथन करती रहें।
• कलश स्थापन : प्रत्येक शक्तिपीठ द्वारा २४ शक्तिकलशों की स्थापना की जायेगी। चयनित गाँवों के चयनित घरों में इन्हें ले जाया जायेगा। एक घर में शक्तिकलश के सान्निध्य में नित्य उपासना, आरती, सामूहिक जप, अनुष्ठान, यज्ञ, संस्कार, स्वाध्याय, संकीर्तन जैसे कार्यक्रम होंगे। उन घरों में ज्ञान मंदिर की स्थापना भी कराई जाएगी, संभव हो तो देव स्थापना भी। ७ दिन बाद शक्तिकलश को अगले घर लेजाया जाएगा। जिन घरों में शक्तिकलशों के समक्ष साधना होगी, उनसे रजत जयंती कार्यक्रम में भागीदारी के लिए नियमित अंशदान, अन्नदान व देववृक्षों की चार- चार समिधाएँ भी निकालने का अनुरोध किया जायेगा।
• सामूहिक कार्यक्रम : प्रत्येक गाँव में प्रभारी टोलियों द्वारा तीन से लेकर पाँच कुण्डीय यज्ञ, दीपयज्ञ, संस्कार, संगोष्ठी, पर्व आयोजन जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे। इन गाँवों में प्रज्ञा मण्डल, महिला मण्डल, युवा मण्डल आदि का गठन किया जाएगा ताकि जनजागरण का क्रम निरंतर आगे बढ़ाने में वह गाँव स्वावलम्बी हो सके।
• रचनात्मक सक्रियता : प्रत्येक गाँव के चयनित २४ घरों के मुख्य सहयोग से बाल संस्कारशाला, प्रौढ़ शिक्षा, वृक्षारोपण, ग्राम स्वच्छता जैसा न्यूनतम कोई एक कार्यक्रम अवश्य सम्पन्न किया जायेगा।
• रजत जयंती के लिए : हर गाँव में रजवंदन कार्यक्रम होगा। वहाँ के जल और मिट्टी से रजत जयंती समारोह के यज्ञ कुण्डों का निर्माण किया जायेगा। प्रत्येक ग्राम समूह के लिए कुण्डों का आबंटन होगा। संकल्पित साधकों को देवपूजन में प्राथमिकता दी जाएगी।


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