शांतिकुंज में गायत्री जयंती-गंगा दशहरा का महापर्व उत्साहपूर्वक मना

Published on 2018-06-22
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गंगा को स्वच्छ व अविरल बनाने के लिए हो संकल्पित ः डॉ पण्ड्यागायत्री और गंगा भाव संवेदनाओं की देवियाँ ः शैलदीदीबड़ी संख्या में गुरुदीक्षा के अलावा विभिन्न संस्कार निःशुल्क सम्पन्न हरिद्वार, 22 जून।
अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गंगा न केवल भारतवासियों के लिए वरन् विश्व समुदाय के लिए भी जीवनदायिनी है। गंगा पतित पावनी है। उनकी शरण में जो भी आता है, बिना किसी भेदभाव के गंगा मैय्या अपनी गोद में स्वीकारती हैं। उसी तरह वेदमाता गायत्री के जप करने वाले साधकों का भी जप कभी निरर्थक नहीं जाता।
                श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय गायत्री जयंती महापर्व के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गंगा दशहरा व गायत्री जयंती मनाने आये देश-विदेश के हजारों स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता एवं निर्मल गंगा जन अभियान में जुटे सैकड़ों युवा मुख्य रूप से मौजूद रहे। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि 2525 किमी दूरी तय करने वाली पतित पावनी गंगा को अविरल एवं स्वच्छ बनाने की दिशा में गायत्री परिवार तन, मन, धन से संकल्पित है। साथ ही गंगा की सहायक नदियों को भी स्वच्छ किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गंगा पावनता की, तो माँ गायत्री प्रखरता की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि देश की विघटनकारी तत्त्वों के मिटने एवं भारतवर्ष के विश्वगुरु बनने का समय बहुत ही निकट है। गायत्री के तीन स्वरूपों की चर्चा करते हुए डॉ. पण्ड्या ने कहा कि श्रेष्ठता का वरण, तेजस्विता तथा सामूहिकता-सहगमन को लेकर गायत्री परिवार चल रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से आने वाले दिनों में कई जटिल समस्याओं का समाधान होता दिखाई देगा। इस दौरान डॉ. पण्ड्या ने मुम्बई में जनवरी-2021 में अश्वमेध महायज्ञ करने की घोषणा की।
                इससे पूर्व संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि गायत्री और गंगा भाव संवेदनाओं की देवियाँ हंै। इनकी प्रेरणाओं को जीवन में उतारने से जीवन महान बनता है। भागीरथी जहाँ स्थूल शरीर को शुद्ध करती हैं, वहीं माँ गायत्री अंतःकरण को पवित्र बनाती है। उन्होंने कहा कि पतित पावनी गंगा ने करोड़ों लोगों को नवजीवन दिया है और आज वे ही अपने पुत्रों को सदाशयता के लिए पुकार रही है, जो उन्हें निर्मल व अविरल बना सकें। श्रद्धेया शैलदीदी ने नवचेतना के अवतरण के लिए बार-बार अभ्यास, सत्कर्मों की याद दिलाते रहने एवं आस्था-भावना को जाग्रत रखने पर बल दिया। शैलदीदी ने गायत्री के तीन चरण-उपासना, साधना व आराधना पर मार्मिक उदाहरण देते हुए इसे नियमित रूप से पालन करने की बात कही। इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने ‘वेद पुराण में धर्म का मर्म’ किताब का विमोचन किया।
                पर्व पूजन का वैदिक कर्मकाण्ड महिला मण्डल की ब्रह्मवादिनी बहिनों ने सम्पन्न कराया, तो वहीं ब्राह्ममुहूर्त में गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने पूज्य आचार्यश्री के प्रतिनिधि के रूप में सैकड़ों श्रद्धालुओं को गायत्री महामंत्र की दीक्षा दी। गायत्री परिवार ने अपने आराध्यदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्यजी की 28वीं पुण्यतिथि को संकल्प दिवस के रूप में मनाते हुए उनके बताये सूत्रों को स्वयं पालन करने एवं दूसरों को प्रेरित करने की शपथ ली। बहिनों ने विभिन्न संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क सम्पन्न कराये। पर्व के अवसर पर लिये संकल्प को पूर्णता तक पहुँचाने के उद्देश्य से सायंकाल दीप महायज्ञ में आहुतियाँ समर्पित कीं। मुख्य कार्यक्रम का संचालन श्री केदार प्रसाद दुबे ने किया।


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